अंडाल : खांद्रा नीलकंठ मंदिर इलाका स्थित धोबी पाड़ा और वर्कशॉप कॉलोनी में मंगलवार दोपहर हुए भीषण भू-धंसान से करीब एक हजार लोगों की जिंदगी पलक झपकते ही तबाह हो गई। घटना के 24 घंटे बाद भी इलाके में दहशत और सन्नाटा पसरा हुआ है। जमीन पर कई फीट चौड़ी दरारें, धंसे हुए आंगन और झुकी हुई दीवारें तबाही का मंजर बयां कर रही हैं। ECL मुख्यालय से पहुंची सेफ्टी विभाग की टीम, डीटी के तकनीकी सचिव और क्षेत्रीय महाप्रबंधक ने घटनास्थल का जायजा लिया। प्रबंधन ने क्षेत्र को अत्यधिक खतरनाक घोषित कर सील कर दिया है।
बारिश और अनिश्चितता के बीच बीती खौफनाक रात
आशियाने छिन जाने के बाद प्रभावितों ने मंगलवार रात भारी अनिश्चितता और डर के साये में रात बिताई। सिर छुपाने की जगह नहीं मिलने पर कई लोगों ने स्थानीय धर्मशाला और यज्ञशाला में शरण ली, वहीं कई खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हुए। लगातार हो रही बारिश ने बेघर परिवारों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। धर्मशाला में बच्चे अपनी किताबें टटोलते दिखे। घटना का असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ा है।
भोजन मिल रहा, लेकिन 'भविष्य' मलबे में दबा
प्रबंधन व प्रशासन ने भोजन का इंतजाम तो किया है, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि सिर्फ खाना काफी नहीं है। वोटर कार्ड, राशन कार्ड, बैंक पासबुक और बच्चों के शैक्षणिक दस्तावेज मलबे में दब चुके हैं। जीवनभर की जमा पूंजी निकालने के लिए लोग दरकते मकानों में घुसने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें पुलिस सुरक्षा कारणों से रोक रही है।
एटक ने की मेडिकल टीम और हेल्प डेस्क की मांग
घटना के दूसरे दिन एटक प्रतिनिधिमंडल ( तापस सिन्हा, ओमप्रकाश तिवारी, कविता राय, जोगेंद्र प्रसाद आदि) ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा बताया कि लगभग 116 मकान प्रभावित हुए हैं। प्राथमिक आकलन के अनुसार हादसा 'एयर ब्लास्ट'के कारण होने की संभावना है। एटक नेता राजू राम ने स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा कि बच्चे और गर्भवती महिलाएं खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। यूनियन ने तत्काल 'हेल्प डेस्क कैम्प' और 'मेडिकल टीम' तैनात करने की मांग की है।
क्या कहा प्रबंधन ने
बंकोला क्षेत्र के महाप्रबंधक आरकेपी सिंह ने कहा,"घटनास्थल के नीचे 80 के दशक का ओल्ड माइनिंग जोन है। प्रबंधन स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है। मंगलवार के बाद से दरारें आगे नहीं बढ़ी हैं।"