आसनसोल

श्रमिक संगठनों ने 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का किया आह्वान

जामुड़िया : केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में देशभर के श्रमिक संगठनों ने 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस संबंध में जारी संयुक्त अपील में कहा गया है कि कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है और आम जनता तथा श्रमिक वर्ग पर इसका सीधा दुष्प्रभाव पड़ रहा है। मांगपत्र में आरोप लगाया गया है कि नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन (एनएमपी) के माध्यम से रेलवे, सड़क, बंदरगाह और ऊर्जा जैसे अहम सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण तेजी से किया जा रहा है। इससे सार्वजनिक संपत्तियां निजी हाथों में जा रही हैं और सरकार को होने वाला राजस्व घट रहा है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के लागू होने से मजदूरों के वर्षों से अर्जित अधिकारों पर संकट खड़ा हो गया है। कोयला क्षेत्र को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। एमडीओ (माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर) मॉडल के जरिए कोयला खदानों का संचालन निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है, जिससे कोल इंडिया लिमिटेड की भूमिका कमजोर हो रही है। ठेका मजदूरों को समय पर वेतन नहीं मिलना, सामाजिक सुरक्षा का अभाव और रोजगार की अनिश्चितता प्रमुख समस्याएं बताई गई हैं। श्रमिक नेता चंडी बनर्जी ने कहा कि यह हड़ताल केवल मजदूरों की नहीं, बल्कि देश की सार्वजनिक संपत्तियों और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। निजीकरण और श्रम संहिताओं के जरिए श्रमिकों को असुरक्षित किया जा रहा है, जिसे हम किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं जीएस ओझा ने कहा कि कोयला उद्योग में व्यावसायिक खनन और एमडीओ मॉडल बंद होना चाहिए। स्थायी श्रमिकों से ही खदानों का संचालन हो, ठेका प्रथा पर रोक लगे और सभी मजदूरों को समय पर पूरा वेतन व सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। मांगपत्र में चार श्रम संहिताओं को रद्द करने, कोयला उद्योग में निजीकरण और व्यावसायिक खनन बंद करने, ठेका मजदूरों को हाई पावर कमेटी के अनुसार वेतन देने, न्यूनतम पेंशन और ग्रेच्युटी के अनिवार्य भुगतान सहित कुल दस प्रमुख मांगें रखी गई हैं। सभा में श्रमिक संगठनों सीटू, एटक, एचएमएस, इंटक, यूटीयूसी, टीयूसीसी और केएमसी ने किसान संगठनों और आम जनता से हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है।

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