बांकुड़ा : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछाते हुए बांकुड़ा जिले में बड़े उलट-फेर किए हैं। तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बड़जोड़ा सीट पर कड़े मुकाबले को देखते हुए एक विशिष्ट समाजसेवक और व्यवसायी गौतम मिश्र (श्याम) को चुनावी मैदान में उतारा है। मंगलवार सुबह पार्टी में शामिल होते ही उन्हें टिकट सौंप दिया गया।
प्रमुख बदलाव और चुनावी समीकरण
पार्टी ने बांकुड़ा सीट से डॉ. अनूप मंडल और रानीबांध सुरक्षित सीट से वर्तमान मंत्री ज्योत्स्ना मांडी का पत्ता काटकर शिक्षाविद तनुश्री हांसदा को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, सबसे अधिक चर्चा बड़जोड़ा सीट की है। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां सत्ता विरोधी लहर और गुटबाजी एक बड़ी चुनौती रही है। 2016 में यहां अभिनेता सोहम चक्रवर्ती को हार का सामना करना पड़ा था, जबकि 2021 में 'भूमिपुत्र' आलोक मुखर्जी ने यह सीट जीती थी। इस बार भाजपा द्वारा वकील बिल्लेश्वर सिंह और माकपा द्वारा सुजीत चक्रवर्ती को उतारने के बाद, तृणमूल ने स्थानीय समीकरणों को साधने के लिए गौतम मिश्र पर दांव खेला है।
कौन हैं गौतम मिश्र ?
जिले में 'श्याम दा' के नाम से प्रसिद्ध गौतम मिश्र एक सफल परिवहन व्यवसायी हैं। वे 'दुर्लभपुर ट्रक ओनर्स एसोसिएशन' से जुड़े हैं। 1998 में तृणमूल के साथ राजनीतिक सफर शुरू करने वाले मिश्र बीच में सक्रिय राजनीति से दूर हो गए थे। 2021 में उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा का दामन थामा था, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने दूरी बना ली। मंगलवार को TMC में वापसी करते हुए उन्होंने भाजपा में बिताए समय को अपनी "सबसे बड़ी भूल" बताया। कोविड काल में उनकी और उनकी पत्नी की समाजसेवा ने उन्हें जिले में 'मानवता का पुजारी' के रूप में स्थापित किया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उनकी स्वच्छ छवि और सामाजिक कार्यों का लाभ आगामी चुनावों में जरूर मिलेगा।