आसनसोल

शिल्पांचल में मेडिकल माफिया खून से भी कमा रहा है रुपया !

निजी ब्लड बैंकों पर नकेल कसने की उठने लगी मांग

आसनसोल : शिल्पांचल में भी पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल माफिया पूरी तरह से सक्रिय हो गये हैं। वे आदमी को आदमी नहीं वरन पैसा छापने की मशीन समझने लगे हैं। स्वास्थ्य सुविधा देने के नाम पर कई खतरनाक व गैरकानूनी कार्य होने लगे हैं। ताजा मामला ब्लड को लेकर सामने आया है। बता दें कि नाबालिग छात्रों को रुपये का प्रलोभन देकर ब्लड डोनेट करवाने का खुलासा हुआ तो सभी चौंक गये। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है। इस खुलासे के बाद अब लोगों में चर्चा होने लगी है कि शिल्पांचल में मेडिकल माफिया पूरी तरह से अपना जाल फैला चुके हैं। कुछ बड़े अस्पतालों ने ब्लड के नाम पर भी लूट मचा रखी है।

कैसे होता है ब्लड में रुपयों का खेल

इस संबंध में रक्तदान आंदोलन से जुड़े प्रबीर धर का कहना है कि एक बोतल रक्त से तीन लोगों की जान बचायी जाती है। अभी कंपोनेंट सिस्टम से एक बोतल ब्लड में से पीआरबीसी, प्लाजमा एवं प्लेटलेट अलग कर लिया जाता है। पेसेंट को जो चाहिए, वही दिया जाता है। वहीं जिसे प्लाजमा चाहिए, उसे प्लाजमा दे दिया जाता है और बाकी के दो कंपोनेंट बेच दिये जाते हैं। अब इसका खेल कैसे प्रारंभ होता है, उसे जानने की जरूरत है। प्रबीर धर का दावा है कि बड़े अस्पताल किसी भी पेशेंट को सरकारी अस्पताल से ब्लड लाने पर उसे स्वीकार नहीं करते हैं या किसी न किसी कारण से उसे मना कर देते हैं। बड़े अस्पताल के लोग पेशेंट के परिजनों को डोनर लाने को कहते हैं। जब वह डोनर लाता है तो ब्लड लेने के लिए भी पेशेंट के परिजनों से ढाई से तीन हजार रुपया ले लिया जाता है। उसके बाद उस पेशेंट को तीन कंपोनेंट में से जो कंपोनेंट चाहिए, वह दे दिया जाता है और बाकी के दो अन्य कंपोनेंट दूसरे मरीजों से मोटी रकम लेकर बेच दिया जाता है। यह एक प्रकार की धोखाधड़ी है। इसलिए व्यावसायिक ब्लड बैंक को लेकर ब्लड डोनेशन कैंप नहीं करना चाहिए।

कुछ प्राइवेट ब्लड बैंक कैसे करते हैं काम

इस संबंध में प्रबीर धर का यह भी दावा है कि प्राइवेट ब्लड बैंक कुछ क्लबों व संस्थाओं को गिफ्ट व दामी टिफिन का लालच लेकर रक्तदान शिविर लगवाते हैं और फिर वे उस रक्त को बेचते हैं। उनका कहना है कि जो कोई भी रक्तदान शिविर लगा रहा है तो उसे सरकारी ब्लड बैंक के साथ जुड़ कर ही शिविर लगाना चाहिए। किसी भी निजी ब्लड बैंक के साथ जुड़कर नहीं करना चाहिए। कुछ लोगों ने इसे व्यवसाय बना दिया है। इसका चौतरफा विरोध होना चाहिए अन्यथा मेडिकल माफिया अपना जाल और मजबूत कर देंगे।

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