आसनसोल : तमाम सरकारी तंत्रों की आंखों में धूल झोंककर प्रतिदिन आसनसोल, बाराबनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में अवैध रूप से पत्थर खदान व क्रशर उद्योग का संचालन कर प्रतिदिन करोड़ों रुपये की सरकारी राजस्व का चूना लगा रहे है। अब अवैध पत्थर व क्रशर को लेकर आदिवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। भारत जकात माझी परगना महल की ओर से शुक्रवार को इसी मुद्दे पर जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष विरोध जताने के बाद जिलाधिकारी एस पोन्नमबलम को ज्ञापन सौंपा। स्वपन मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समाज वर्षों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते आ रहे हैं। पत्थर खदान व क्रशर से मजदूरों को सेलिकोसिस संक्रमण के कारण मौत हो रही है। लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। कारोबार विस्तारीकरण के लिए जंगलों का काटा जा रहा है। आदिवासी अपनी संस्कृति को बचाने के लिए हर सीमाओं को लांघने के लिए तैयार है। इसके पहले बाराबनी, सालानपुर सहित विभिन्न थाने में ज्ञापन दिया गया था। जिलाधिकारी एस पोन्नमबलम को ज्ञापन सौंप कर अविलंब आसनसोल व इसके आसपास के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध रूप से चल रहे पत्थर खदान व क्रशर उद्योग को तुरंत बंद करने का आग्रह किया है। अगर उक्त उद्योग बंद नहीं हुआ तो आदिवासी संगठन पथावरोध व विभिन्न प्रशासनिक कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगें। मौके पर संटू किस्कू,बाबूनाथ हासंदा,श्याम मुर्मू सहित कई सदस्य उपस्थित थे।