संजय, सन्मार्ग संवाददाता
अंडाल : दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के दुर्गापुर इस्पात ताप विद्युत केंद्र (डीएसटीपीएस) स्थित स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस के उपलक्ष्य में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) का एक दिवसीय तकनीकी सेमिनार आयोजित किया गया। जिसका मुख्य विषय ''डिजिटल युग में अनुवाद: राजभाषा हिंदी के संदर्भ में चुनौतियां, तकनीकी नवाचार और मानवीय संवेदनशीलता'' रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ''वंदे मातरम्'', दीप प्रज्ज्वलन एवं डीवीसी गीत के साथ हुआ। इस दौरान अतिथियों ने भाषाविदों के विचारों और राजभाषा कार्यान्वयन के चेक-पॉइंट्स पर आधारित 3 बड़े पोस्टरों का विमोचन किया। मंच संचालन हिंदी अधिकारी इस्माईल मियां ने किया, जबकि स्वागत भाषण वरिष्ठ महाप्रबंधक (ओ एंड एम) सुखदेव खां ने दिया।
मानवीय संवेदना ही भाषा की आत्मा: सीजीएम
परियोजना प्रधान एवं मुख्य महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन ने कहा कि डिजिटल टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) काम की गति बढ़ा सकते हैं, लेकिन भाषा के मर्म, संदर्भ और आत्मा को बनाए रखने के लिए मानवीय संवेदनशीलता अनिवार्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी सदस्य संस्थानों के साझा प्रयास से यह समिति राष्ट्रीय स्तर पर कीर्तिमान स्थापित करेगी। एनपीटीआई दुर्गापुर के निदेशक डॉ. एनके श्रीवास्तव ने कहा कि अनुवाद ज्ञान का सेतु है और डिजिटल दौर में अनुवादकों की भूमिका और अहम हो गई है।
तकनीकी सत्र में न्यूरल टूल्स पर मंथन
राष्ट्रीय होम्योपैथिक संस्थान, कोलकाता के परामर्शदाता अजयेंद्रनाथ त्रिवेदी ने न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन व एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग पर व्याख्यान दिया। ओपन फोरम में प्रतिभागियों ने तकनीकी बारीकियों पर सवाल-जवाब किए। सत्र में एनपीटीआई के निदेशक मनोज कुमार झा, सीएमईआरआई के वैज्ञानिक डॉ. सत्य प्रकाश सिंह, डीएसटीपीएस के जीएम सत्य रंजन पांडा, अरुंधती मुखर्जी व डॉ. आशुतोष तिवारी ने भी विचार रखे।
उत्कृष्ट कार्यों के लिए संस्थान सम्मानित
समारोह के समापन पर सीजीएम अनिल कुमार जैन ने बेहतर राजभाषा क्रियान्वयन के लिए सदस्य संस्थानों को ‘राजभाषा प्रशस्ति फलक’ एवं प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र सौंपे। धन्यवाद ज्ञापन डीजीएम (एचआर) श्रीकांत गेडेला ने किया। संगोष्ठी में ईएसआईसी, पीएनबी, केंद्रीय विद्यालय, सीएमईआरआई, पावरग्रिड, मेकॉन, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ के अधिकारी व प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे।