संजय, सन्मार्ग संवाददाता
बर्दवान : शुक्रवार को मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बर्दवान की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। इसे लेकर प्रशासनिक तैयारियां चरम पर हैं। इसी माहौल के बीच बर्दवान के दक्षिण दामोदर स्थित कृष्णपुर कुकुड़ा गांव के निवासी उत्साह से लबरेज हैं। राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी के आसीन होने के बाद यह बात सामने आई थी कि ''अधिकारी'' परिवार का मूल निवास इसी कृष्णपुर कुकुड़ा गांव में था। इस संबंध में मीडिया में खबरें भी प्रकाशित हुई थीं। इसके बाद से ही शुभेंदु अधिकारी को इस गांव में लाने के लिए व्यापक प्रयास शुरू हो गए हैं।
कृष्णपुर कुकुड़ा गांव के निवासी तथा घनराम संस्कृति चर्चा केंद्र के सचिव विश्वरूप चक्रवर्ती ने बताया कि शुभेंदु बाबू इसी चक्रवर्ती वंश के वंशज हैं। मंगलकाव्य के प्राण पुरुष और ''धर्ममंगल काव्य'' के महान रचयिता महाकवि घनराम चक्रवर्ती इसी परिवार की संतान थे। उनकी स्मृति में हर साल बांग्ला महीने के 25 से 28 माघ तक मेले, विचार गोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। विश्वरूप बाबू ने बताया कि अगला उत्सव 9 फरवरी 2027 से शुरू हो रहा है। इस उत्सव के उद्घाटनकर्ता के रूप में वे शुभेंदु अधिकारी से गांव आने का अनुरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को वे अपना यह आवेदन मुख्यमंत्री को सौंपेंगे। बर्दवान इतिहास एवं पुरातत्व चर्चा केंद्र के महासचिव डॉ. सर्बजीत यश ने बताया कि इतिहास से पता चलता है कि लगभग 500 साल पहले इस अधिकारी परिवार का निवास कृष्णपुर कुकुड़ा गांव में ही था।
कैसे जुड़ा है सीएम का इस गांव से उनका रिश्ता
जब चैतन्य महाप्रभु राढ़ परिक्रमा के अंत में बादशाही रोड (वर्धमान-आरामबाग-घाटाल-चंद्रकोना-मेदिनीपुर शहर) से होते हुए महाबलेश्वर रोड के रास्ते दांतन पार कर ओडिशा जा रहे थे, तब इस परिवार के पूर्वज श्री चैतन्य महाप्रभु के सफर में शामिल हो गए थे। चैतन्य महाप्रभु के प्रभाव में आकर वे वैष्णव बन गए और उन्हें ''अधिकारी'' की उपाधि मिली। यह बादशाही रोड कृष्णपुर कुकुड़ा गांव के पास से ही गुजरती है। सर्बजीत यश ने बताया कि सुना जाता है कि ओडिशा जाने के बाद इस परिवार की कुछ पीढ़ियां काफी समय तक ओडिशा में रहीं और उसके बाद वे मेदिनीपुर आ गए। 1510 ईस्वी के आसपास कृष्णपुर कुकुड़ा गांव के चक्रवर्ती परिवार के जो सदस्य चैतन्य देव के साथ गए थे, उसी परिवार की एक अन्य शाखा में लगभग 160 साल बाद (1669 ईस्वी के आसपास) धर्ममंगल काव्य के आधुनिकतम और राढ़ के राष्ट्रीय महाकाव्य के रचयिता कवि घनराम चक्रवर्ती का जन्म हुआ था। इसलिए, यदि शुभेंदु अधिकारी इस गांव में चक्रवर्ती परिवार के वंशज के रूप में कदम रखते हैं, तो यह वास्तव में एक ऐतिहासिक क्षण होगा। दूसरी ओर, शुभेंदु अधिकारी को उनके पूर्वजों के इस गांव में लाने के लिए केवल उस परिवार के विश्वरूप चक्रवर्ती, राममोहन चक्रवर्ती, सुभाष चक्रवर्ती, असित चक्रवर्ती सहित लगभग 24 सदस्य ही आवेदन नहीं कर रहे हैं, बल्कि वर्धमान इतिहास एवं पुरातत्व चर्चा केंद्र के सचिव डॉ. सर्बजीत यश, प्रख्यात चिकित्सक डॉ. श्रेष्ठा चक्रवर्ती, भाजपा के स्थानीय मंडल अध्यक्ष समीर मंडल और बूथ अध्यक्ष तिमिर हाजरा आदि ने भी मिलकर यह संयुक्त आवेदन किया है। फिलहाल, पूरे इलाके के लोग मुख्यमंत्री की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं कि क्या वे इस अनुरोध को स्वीकार करते हैं या नहीं।