आसनसोल

'बेलगाम पूलकारों पर नकेल कसने का डीसी ने दिया निर्देश'

31 मार्च तक सभी स्कूलों को रोड सेफ्टी कमेटी बनाने का आदेश

आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिले में अक्सर पूलकारों की मनमानी व ट्रैफिक नियमों को नहीं मानने की शिकायत मिलती रहती है। स्कूल बसों और पूलकार से बच्चों को स्कूल लाने व ले जाने के बारे में स्कूल अधिकारियों के साथ गुरुवार को जिला प्रशासनिक कार्यालय के सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक की गयी। आसनसोल -दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के डीसी (ट्रैफिक) पीवीजी सतीश ने ट्रैफिक नियम नहीं मानने वाले पूलकारों की नकेल कसने का निर्देश दिया। इसके साथ ही सभी स्कूलों के प्रतिनिधियों को 31 मार्च के भीतर स्कूल रोड सेफ्टी कमेटी बनाने का निर्देश दिया। इस कमेटी में अभिभावक, विद्यार्थी व ट्रांसपोर्ट के प्रतिनिधियों को भी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि स्कूल बसों व पूलकारों के लिए ट्रांसपोर्ट विभाग की एक एडवाइजरी कमेटी होने के बावजूद ट्रैफिक नियमों को नहीं माना जा रहा है। निजी गाड़ियों में निर्धारित संख्या से अधिक बच्चों को भर कर काफी तेज रफ्तार से गाड़ी चलायी जा रही है। वहीं कुछ निजी गाड़ियों (पूलकार) के ड्राइवरों को कथित तौर पर नशे में गाड़ी चलाते हुए देखा जा रहा है, जो बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे ड्राइवरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कमेटी निजी पूलकारों पर नजर रखेगी। कमेटी की शिकायत मिलने पर उक्त पूलकार को व उसके ड्राइवर का लाइसेंस जब्त कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना फिटनेस के गाड़ी चलाकर बच्चों को ले जाने वाले ड्राइवरों पर कार्रवाई करते हुए गाड़ी को जब्त किया जाएगा। सभी निजी पूलकारों के कागजात ठीक होने चाहिए। गाड़ी के फिटनेस प्रमाण पत्र की भी जांच की जाएगी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को भी विभिन्न स्कूलों के पास पूलकार व ड्राइवर पर निगरानी रखने का आदेश देते हुए कहा कि नियम का उल्लंघन करने वाले पूलकारों व उसके ड्राइवर की गिरफ्तारी व गाड़ी जब्त कार्रवाई तेज की जायेगी। मौके पर अतिरिक्त जिलाधिकारी (शिक्षा व विकास) कौशिक सिन्हा, अतिरिक्त जिलाधिकारी (सामान्य) सुवासिनी ई, व्यापक संख्या में पुलिस अधिकारी, ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारी व विभिन्न स्कूलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

पूलकारों की होगी गिनती

बैठक में अधिकारियों को पूलकारों की गिनती करने का भी निर्देश दिया गया है। बता दें कि काफी संख्या में निजी गाड़ियों को भी लोग पूलकार के रूप में उपयोग करने लगे हैं। अब प्रशासनिक अधिकारी पूलकारों की सही गिनती पर भी जोर देंगे। इससे एक ओर जहां इस प्रकार की गाड़ियों पर प्रशासनिक शिकंजा कसेगा तो वहीं सरकार को राजस्व का भी लाभ होगा। इतना ही नहीं इससे बच्चों की सुरक्षा भी अधिक सुनिश्चित होगी।

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