अंडाल : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की प्रतिष्ठित झांझरा भूमिगत कोयला खदान में कामगारों को अब उमस से राहत मिलेगी। उल्लेखनीय है कि खदान की गहराई में तापमान नियंत्रित करने के लिए झांझरा प्रोजेक्ट में अत्याधुनिक ''चिलिंग प्लांट'' इनस्टॉल किया जा रहा है। ईसीएल और कोल इंडिया के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला चिलिंग प्लांट होगा। झांझरा MIC में वर्तमान में 1 लॉन्ग वाल और 6 कंटीन्यूअस माइनर सेक्शन संचालित हैं, जहां कामगार अब तक गर्मी के बीच काम करने को मजबूर थे। इस पहल से कामगारों में खुशी का माहौल है। सीएमसी-एचएमएस के महासचिव व जेबीसीसीआई सदस्य एसके पांडेय ने ECL की इस पहल के लिए CMD सतीश झा की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इससे निःसंदेह लॉन्ग वाल व सीएम सेक्शन में कार्य करने वाले कामगारों को राहत मिलेगी। झांझरा क्षेत्र के महाप्रबंधक प्रबीर कुमार मंडल ने बताया कि प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी एक प्राइवेट कंपनी को दी गई है। यह प्लांट अक्टूबर तक पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगा। झांझरा MIC माइंस के D-शाफ्ट (डाउन कास्ट शाफ्ट) में चिलिंग प्लांट इनस्टॉल किया जा रहा है।
कैसे करेगा काम
यह प्लांट हवा को 9°C तक ठंडा कर 5,000 क्यूबिक फीट प्रति मिनट की रफ्तार से खदान के अंदर भेजेगा। डी-शाफ्ट के रास्ते ठंडी हवा खदान में करीब 260 मीटर नीचे लॉन्ग वाल पैनल तक पहुंचेगी।
क्यों है चिलिंग प्लांट की जरूरत ?
खदान की अत्यधिक गहराई में चट्टानों के प्राकृतिक तापमान, मशीनों के घर्षण और वायु दबाव के कारण अंदर का तापमान काफी बढ़ जाता है। नियम के मुताबिक खदान का अधिकतम तापमान 33.5°C से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि 20°C से 27°C तापमान को आदर्श माना जाता है। तापमान घटने से कामगारों को सुरक्षित और अनुकूल माहौल मिलेगा। झांझरा प्रोजेक्ट को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 37 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य मिला है। कार्य-कुशलता बढ़ने से उत्पादन लक्ष्य हासिल करना आसान होगा। लॉन्ग वाल पैनल के इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरणों के खराब होने की दर में कमी आएगी।