संजय, सन्मार्ग संवाददाता
बांकुड़ा : बांकुड़ा जिले में राजनीतिक हत्याकांड का दर्द झेल रहे दो परिवारों की आंखें वर्षों बाद भी इंसाफ की राह देख रही हैं। एक मामला 2010 में लेफ्ट शासन (LF) के दौरान TMC समर्थक की बर्बर हत्या का है, तो दूसरा 2011 में सत्ता बदलते ही 2012 में CPM कार्यकर्ता की हत्या से जुड़ा है। डेढ़ दशक से अधिक समय बीत जाने के भी दोनों वारदातों के अभियुक्तों को सजा न मिलने की टीस झेल रहे इन दोनों परिवारों के दरवाजे पर अब भारतीय जनता पार्टी पहुंची है।
सोनमुखी के विधायक और राज्यमंत्री दिवाकर घरामी ने पात्रसायर थाना अंतर्गत फकीरडांगा और कांटा दिघी पहुंचकर दोनों पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और दोनों मामलों को कानूनी रूप से री-ओपन कराने का भरोसा दिया।
पहला मामला (2010): सूखी मिर्च जलाकर TMC कार्यकर्ता को दमघोंटू बनाया, फिर गोलियों से भूना
साल 2010 में फकीरडांगा निवासी TMC समर्थक शेख बदरे आलम की राजनीतिक रंजिश में नृशंस हत्या कर दी गई थी। जान बचाने के लिए वह घर में बंद हो गए थे, लेकिन हमलावरों ने घर में सूखी मिर्च जलाकर धुआं झोंक दिया। इसके बाद छत तोड़कर घुसे और गोली-बम मारकर उनकी हत्या कर दी थी। बेटे शेख सूरज ने कहा, "माकपा के लोगों ने पिता को मारा था। TMC राज में न्याय नहीं मिला, शायद अब दोषियों को सजा मिल सके।"
दूसरा मामला (2012): रिश्तेदार के घर से अगवा कर CPM कार्यकर्ता की हत्या
16 अगस्त 2012 को कांटा दिघी निवासी CPM कार्यकर्ता शेख लियाकत मिद्या की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। सत्ता परिवर्तन के बाद से वे बेघर थे। परिजनों के अनुसार, पात्रसायर में रिश्तेदार के घर से अगवा कर उन्हें कुड़चीबागान मैदान ले जाया गया, जहां औजार से उंगलियों के नाख़ून उखाड़ रॉड, सब्बल और पत्थरों से पीट-पीटकर मार डाला गया। वारदात के वक़्त पानी मांगने पर हत्यारों ने अमानवीय व्यव्हार किया था। मृतक की पत्नी अखतरा बेगम ने कहा, "गरीबों को सिर्फ सांत्वना मिलती है, न्याय नहीं। जो दर्द हमने झेला है, वह कभी वापस नहीं लौट सकता।"
मंत्री का आश्वासन: दोनों परिवार चाहे तो केस री-ओपन कराएंगे
मंत्री दिवाकर घरामी ने कहा कि आज माकपा के नेतागण लंबा-लंबा भाषण और तृणमूल के लोग शांति की बात करते है। दोनों दलों के नेतृत्व फकीरडांगा और कांटा दिघी गांव आकर इन परिवारों से मिले और बताएं इन्हें न्याय क्यों नहीं मिला। परिवार चाहेगा तो दोनों फाइलों की दोबारा जांच कराकर कोर्ट में री-ओपन पैरवी की जाएगी। साथ ही लियाकत मिद्या के परिवार को पक्का मकान और बेटी को रोजगार देने की बात कही।