संजय सन्मार्ग संवाददाता बांकुड़ा: 'मां के चरणों में सच्ची श्रद्धा और प्रार्थना करते ही नौकरी मिल जाएगी...' यह सिर्फ कोई सुनी-सुनाई बात नहीं, बल्कि बांकुड़ा जिले के सोनमुखी शहर में बसी एक अटूट आस्था है। यहां के एक प्राचीन मंदिर में बेरोजगार युवाओं की मन्नतें पूरी होने का जो सिलसिला दशकों पहले शुरू हुआ था, वह आज भी बदस्तूर जारी है। सोनमुखी शहर के धर्मतला इलाके में स्थित प्रसिद्ध 'सर्विस काली' मंदिर आज लाखों श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
क्यों पड़ा अनोखा नाम 'सर्विस काली'?
इस मंदिर के अनूठे नामकरण के पीछे एक दिलचस्प इतिहास और जनश्रुति जुड़ी हुई है। स्थानीय बुजुर्गों और जानकारों के अनुसार, लगभग वर्ष 1940 के आसपास सोनमुखी के धर्मतला इलाके में कुछ युवक बेरोजगारी के भीषण दौर से गुजर रहे थे और आर्थिक तंगी से अत्यधिक व्यथित थे। इन बेरोजगार युवाओं ने हार न मानते हुए धर्मतला के सरकुन्ड़ के पास माता काली की पूजा-अर्चना शुरू की। उन्होंने मां के दरबार में मन्नत मांगी कि यदि उन्हें रोजगार मिल जाएगा, तो वे इस प्रांगण में भव्य तरीके से पूजा का आयोजन करेंगे।
कहा जाता है कि मां ने अपने भक्तों की पुकार अनसुनी नहीं की। चमत्कारिक रूप से, अगले ही वर्ष वे सभी युवक विभिन्न संस्थानों में नौकरियां पाकर अपने जीवन में सेटल हो गए। इस मनोकामना पूर्ति के बाद, उन युवाओं और स्थानीय लोगों ने हर साल बड़े पैमाने पर इस काली पूजा को आयोजित करने का संकल्प लिया और तभी से इस ऐतिहासिक अनुष्ठान का नाम 'सर्विस काली पूजा' पड़ गया।
पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ रही है लोगों की अटूट आस्था
समय बीतता गया, लेकिन इस मंदिर और मां के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक प्रगाढ़ होता गया। आज स्थिति यह है कि सोनमुखी ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी बेरोजगार युवा और उनके परिवार सच्चे मन से माँ के दरबार में अपनी अर्जी लेकर पहुंचते हैं।
समय के साथ इस ऐतिहासिक पूजा की कमान अब ग्राम 'सोलह आना' के हाथों में आ चुकी है, जो पूरे समर्पण के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। यहां रोजाना सैकड़ों भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं, कार्तिक अमावस्या के पावन अवसर पर यानी मुख्य काली पूजा के दिन यहां श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ता है कि पूरा सोनमुखी शहर उत्सव में डूब जाता है।
क्या कहती है पूजा कमेटी सर्विस काली पूजा कमेटी के अध्यक्ष वासुदेव चक्रवर्ती ने कहा, 'माता के प्रति भक्तों की यह अटूट श्रद्धा हमारी पीढ़ियों से चली आ रही है। आज भी दूर-दूर से लोग नौकरी और अपने उज्ज्वल भविष्य की कामना लेकर मां के दरबार में आते हैं और निराश नहीं लौटते। हर साल की तरह इस बार भी मां सर्विस काली की पूजा पूरे उल्लास और भव्यता के साथ होगा। पूजनोत्सव की तैयारी जारी है।'