संजय सन्मार्ग संवाददाता बांकुड़ा: उत्तराखंड के केदारताल में ट्रेकिंग के दौरान बर्फीले तूफान में जान गंवाने वाले चार युवकों के शव रविवार को बांकुड़ा स्थित उनके पैतृक गांवों में पहुंच गए। दीपावली और काली पूजा के पावन पर्व पर चार दोस्तों सालबनी गांव निवासी रिंटू मंडल, उदय घोष,
तापस बाउरी और केशरा गांव निवासी मनोज खावास के शव ताबूत में पैतृक गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में मातम छा गया और परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। दल के पांचवें सदस्य रतन घोष का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और वे अब भी लापता हैं।
शव यात्रा के दौरान अंतिम दर्शन करने और श्रद्धांजलि देने के लिए भारी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। इस दुखद घड़ी में जिला प्रशासन की ओर से बांकुड़ा के जिला अधिकारी अनीश दासगुप्ता, विधायक नीलाद्री शेखर दाना सहित कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री 12 नवंबर को करेंगे शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात
इस भीषण त्रासदी से शोकाकुल सालबनी और केशरा गांवों के पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने और उनके साथ खड़े होने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी आगामी 12 नवंबर को सालबनी का दौरा करेंगे। जिला अधिकारी अनीश दासगुप्ता ने रविवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री सीधे तौर पर पीड़ित परिवारों के सदस्यों से मुलाकात करेंगे।
27 अक्टूबर से थे लापता, एक की तलाश अभी भी जारी
प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, गत 27 अक्टूबर से बांकुड़ा के सालबनी और केशरा गांव के पांच दोस्तों समेत दल के 8 लोग उत्तराखंड के उत्तरकाशी में केदारताल ट्रेकिंग के दौरान लापता हो गए थे। उत्तराखंड सरकार ने इस बात की पुष्टि की थी कि बर्फीले तूफान की वजह से कई पर्वतारोही फंस गए हैं। इसके बाद जिला और राज्य प्रशासन ने उत्तराखंड सरकार के सहयोग से युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया।
खराब मौसम के कारण तलाश अभियान अस्थायी रूप से स्थगित
जिला अधिकारी अनीश दासगुप्ता ने बताया कि उत्तराखंड प्रशासन ने 1 नवंबर से 6 नवंबर तक व्यापक स्तर पर बचाव अभियान चलाया। हालांकि, खराब मौसम के कारण फिलहाल तलाशी अभियान को अस्थायी तौर पर रोक दिया गया है। मौसम में सुधार होने के बाद लापता रतन घोष की तलाश फिर से शुरू की जाएगी। बांकुड़ा जिला प्रशासन उत्तरकाशी प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ है।
विधायक नीलाद्री शेखर दाना ने कहा कि पिछले 10 दिनों से परिजन लगातार गहरी अनिश्चितता और तनाव में थे। कोलकाता से सीधे शवों को सालबनी गांव लाया गया, जिसके बाद जिला प्रशासन की देखरेख में मनोज खावास का पार्थिव शरीर उनके परिवार को सौंपकर केशरा गांव पहुंचाया गया। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि इस मुश्किल वक्त में सरकार हरसंभव पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।