आसनसोल : बंगाल में चली भाजपा की बयार में पश्चिम बर्दवान जिला में तृणमूल कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है। सभी 9 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा हो गया। पूरे जिले में भाजपा का ध्वज लहराते ही भाजपा के नेताओं ने दुर्गापुर नगर निगम पर ध्यान लगा दिया। डीएमसी के आयुक्त को ज्ञापन भी दिया गया। अब आसनसोल नगर निगम की बारी है। भाजपा नेताओं ने आसनसोल नगर निगम पर कब्जा के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति प्रारंभ कर दी है। सूत्रों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के कई पार्षद भाजपा विधायकों के संपर्क में आ गये हैं। वहीं जैसे-जैसे दिन बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे इनकी संख्या भी बढ़ रही है। एक ओर जहां कुछ पार्षद इस्तीफा देने को तैयार हैं तो कुछ पाला बदलने की तैयारी कर रहे हैं। भाजपा से सिग्नल मिलते ही वे कभी भी पार्टी बदल सकते हैं। हालांकि भाजपा राज्य नेतृत्व ने फिलहाल एक माह तक किसी को भी भाजपा में शामिल नहीं करवाने का निर्देश दिया है। इस निर्देश के बाद आसनसोल नगर निगम में बदलाव के लिए पार्षदों को तृणमूल छोड़ भाजपा में शामिल करवाने की अंदरूनी तैयारी चलेगी। हालांकि भाजपा नेतृत्व इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं कह रहे हैं पर ऐसी स्थिति कुछ स्थानों पर देखने को मिल रही है।
दुर्गापुर एवं आसनसोल में है फर्क
जानकारों का कहना है कि दुर्गापुर एवं आसनसोल में काफी फर्क है। दोनों नगर निगम की कानूनी स्थिति अलग-अलग है। दुर्गापुर नगर निगम में राज्य सरकार द्वारा नामित व्यक्ति वहां एडमिनिस्ट्रेटर (प्रशासक) बना हुआ है। अब जब राज्य सरकार भाजपा की बन रही है तो वहां राज्य सरकार का प्रतिनिधि ही एडमिनिस्ट्रेटर बनेगा अर्थात दुर्गापुर नगर निगम में भाजपा के विधायक व भाजपा द्वारा नामित कोई भी व्यक्ति निगम का प्रशासक बन सकता है पर आसनसोल में ऐसा नहीं है। यहां पूर्ण बहुमत वाला निर्वाचित बोर्ड है। इसलिए आसनसोल नगर निगम पर भाजपा आसानी से कब्जा नहीं कर सकती है।
क्या है कानूनी प्रावधान
जानकारों का कहना है कि इसके लिए दो ही रास्ते हैं। पहला रास्ता है कि निगम में दो तिहाई बहुमत से बोर्ड को पहले गिराना होगा, उसके बाद फिर से बहुमत साबित कर बोर्ड बनाना होगा। वहीं दूसरा रास्ता चुनाव है पर बिना बोर्ड भंग हुए चुनाव हो नहीं सकता। इसलिए जानकारों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के पार्षदों को तोड़कर भाजपा बोर्ड बनाने पर विचार कर सकती है।
आसनसोल नगर निगम में क्या है स्थिति
आसनसोल नगर निगम में 106 वार्डों में भाजपा के 4 पार्षद हैं। 2 वार्ड के पार्षदों की मौत हो जाने के कारण दोनों ही वार्ड खाली है। 1-1 पार्षद कांग्रेस एवं माकपा के हैं, जबकि 98 पार्षद तृणमूल कांग्रेस के हैं। अब भाजपा का निगम पर तभी कब्जा हो सकता है जब उसके पास 67 पार्षदों का समर्थन हो जायेगा जो फिलहाल संभव होता नहीं दिख रहा है। फिर भी राजनीतिक हलकों में इसे लेकर जमकर चर्चा हो रही है।