बदलते युग के साथ ही हमारा परिवेश भी बदल रहा है। पहले जहां लोग भूमि पर आसन लगाकर उस पर पालथी मारकर खाना खाया करते थे, वहीं आज लोग डाइनिंग टेबल के चारों ओर बैठकर उस पर सजी डिश का स्वाद चखते हैं। डाइनिंग टेबल को सजाने के लिए प्रायः लोग डाइनिंग रूम में या लिविंग रूम में एक कोने में इसकी व्यवस्था करते हैं।
डाइनिंग रूम की साज-सज्जा कोई साधारण बात नहीं है कि बस एक डाइनिंग टेबल लेकर ही पूर्ण हो जाए। यह एक अत्यन्त ही आवश्यक स्थान होता है जहां आपको अपनी दिनचर्या का सबसे आवश्यक कार्य अर्थात् नाश्ता, भोजन आदि प्रतिदिन करना होता है।
खाना खाने की जगह सामान्यतः रसोईघर के निकट ही होती है। अगर आपके घर में कोई ऐसा स्थान न हो तो कोशिश करें कि यह स्थान रसोईघर के निकट ही बनाएं। इसके अतिरिक्त डाइनिंग रूम से जुड़ा बाथरूम, वॉशरूम, या सिर्फ एक वॉश बेसिन अवश्य बनाएं।
डाइनिंग रूम में फर्नीचर अर्थात डाइनिंग टेबल, डाइनिंग वैगन या बर्तन रखने की अलमारी किन स्थानों पर हो, इसका ध्यान रखना भी जरूरी होता है। डाइनिंग टेबल के साइज का निर्धारण अपने पास उपलब्ध जगह और अपनी जरूरत के अनुरूप ही करना चाहिए।
कभी-कभी ऐसा भी होता है कि डाइनिंग हॉल में बड़ी जगह होती है लेकिन जरूरत मात्र चार कुर्सियों वाली मेज की होती है तो ऐसी स्थिति में बेमतलब बड़ी डाइनिंग टेबल को नहीं रखना चाहिए। सीमित स्थान में ही छोटी डाइनिंग टेबल रखकर बाकी बचे हुए जगह का इस्तेमाल अन्य प्रायोजनों के लिए किया जा सकता है।
डाइनिंग टेबल की कुर्सियां आरामप्रद होनी चाहिए क्योंकि खाने के मेज पर पीठ दुखती कुर्सियों पर बैठकर मुस्कुराना बड़ा ही कठिन कार्य होता है। कुर्सियों को अपनी आंतरिक साज-सज्जा से मेल खाता हुआ, पूर्ण या आंशिक अपहोल्स्टरी वाला ही बनवाना चाहिए। ये कुर्सियां किसी भी मेज के डिजाइन के साथ आसानी से मेल खा जाती हैं।
डाइनिंग रूम की दीवारों पर पेंटिंग, डाइनिंग थीम के अनुरूप ही लगनी चाहिए। फलों के चित्र, खाने के मेज पर बैठे लोग वाले थीम सर्वथा उपयुक्त होते हैं। डाइनिंग रूम का फर्श भी ऐसा होना चाहिए जिसे आसानी से साफ किया जा सके। इस स्थान पर कारपेट न लगाकर पत्थर, लकड़ी आदि मैटीरियल का हाई फ्लोरिंग ही कराना चाहिए।
डाइनिंग रूम की प्रकाश व्यवस्था भी अत्यन्त आवश्यक होती है। कोशिश यह रखनी चाहिए कि डाइनिंग रूम में प्रकाश स्रोत छिपे हुए ही रहें। इस रूम के लिये पीला प्रकाश ही सर्वोत्तम होता है, अतः इस कमरे में सफेद प्रकाश का प्रयोग कम ही किया जाना चाहिए।
प्रकाश व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो जरूरत के अनुरूप तेज या हल्की की जा सके। इसके अतिरिक्त डाइनिंग टेबल पर शमादानों और मोमबत्तियों को सजाकर भी रखा जा सकता है ताकि लाइन के कटने पर कैंडल लाइट डिनर का आनंद उठाया जा सके।
डाइनिंग रूम की दीवारों पर कोई भी ऐसा रंग हो जो रूम के साथ-सज्जा से मेल खाता हुआ हो। चटख लाल, पीला और नारंगी रंग स्वागतकारी और भूख बढ़ाने वाले होते हैं। वैसे कोई भी रंग जो आपको पसंद हो और सबको अच्छा लगे, उसे डाइनिंग रूम में करवाया जा सकता है।
उपरोक्त साज-सज्जाओं के अतिरिक्त डाइनिंग टेबल पर खाने की प्लेटों एवं डिश की सामग्रियों को सजाकर रखने का भी अपना एक अलग तरीका होता है। कुर्सी पर बैठ जाने के बाद खाना खाने से पहले इसकी साज-सज्जा ही खाने वाले को अपनी ओर आकर्षित करती है।
डाइनिंग टेबल पर ताजे फूलों के गुलदस्ते, करीने से सजाई गई प्लेटें, डिश, पाट, पानी का गिलास, कटे हुए फल, सलाद, पानी का जग, अचारदानियां, नमकदानी आदि वस्तुओं को भी सजाकर यथा स्थान पर रख देना चाहिए।
डाइनिंग रूम की सजावट व स्वादिष्ट व्यंजन सुघड़ गृहिणी की पहली पहचान होती है।
पूनम दिनकर(उर्वशी)