दिल का मामला बहुत नाजुक होता है। जब भी किसी परिस्थितिवश दिल टूटता है तो प्रभाव दोनों पर पड़ता है। पहले माना जाता था कि स्त्रियां दिल के मामले में कमजोर होती है लेकिन अब एक अध्ययन के अनुसार यह बात साबित हुई है कि पुरुष भी तनावग्रस्त होते हैं। यह भी सच है कि पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों के कंधों पर यादों का बोझ ज्यादा होता है इसलिए वे अधिक समय तक तनावग्रस्त रहती हैं।
ब्रेकअप होने का दुख महिलाओं और पुरुषों दोनों को होता है, फिर भी महिलाएं अधिक तनावग्रस्त होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पुरुषों और महिलाओं की प्रायरिटीज भिन्न होती हैं। पुरुषों की प्रायरिटीज बाहर के कामों में, टीवी देखने में, न्यूजपेपर पढ़ने में, आर्थिक मामलों में, राजनीति में होती है। इमोशंज उनमें सबसे अंतिम प्रायरिटी होती है जबकि महिलाओं के केस में एकदम उलट होता है। उनकी इमोशंस की प्रायरिटी पहले होती हैं, बाकी बाद में, इसलिए दिल टूटने पर महिलाएं ज्यादा परेशान होती हैं। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को पहले अपने परिवार के बारे में सोचना पड़ता है। इसलिए महिलाएं बंधनों में बंधी रहती हैं जबकि पुरुष के लिए जिंदगी बिंदास होती है।
पुरुष भी होते हैं तनावग्रस्त:-
पुरुष भी होते हैं परेशान पर वे अपने आपको दूसरे कामों में व्यस्त रखते हैं और जल्दी उन इमोशंज से बाहर आ जाते हैं। महिलाओं में एक कमी होती है कि जब वे किसी को प्यार करती हैं तो सब कुछ उनसे शेयर करना चाहती हैं और अपने भविष्य को इमोशनल तौर पर सुरक्षित करना चाहती हैं। यही कारण है कि पुरुषों से ज्यादा सपोर्ट चाहती हैं जबकि पुरुष अपना फोकस काम और अन्य चीजों पर रखते हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं। वे अपनी बातों को सोचकर अधिक परेशान नहीं होते पर सभी पुरूष एक जैसे नहीं होते। कुछ ऐसे पुरुष भी होते हैं जो ब्रेकअप के बाद स्वयं को टूटा हुआ महसूस करते हैं।
अधिक न सोचें उस बारे में:-
जितना आप ब्रेकअप रिलेशनशिप के बारे में सोचेंगे, उतने अधिक टेंस रहेंगे। अधिक तनाव से आप नकारात्मक होंगे और हेल्पलेस महसूस करेंगे। लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने से डिप्रेशन में पहुंच जाएंगे जो ठीक नहीं, इसलिए पुरानी बातों व यादों से जल्दी छुटकारा पाने का प्रयास करें। स्वयं को किसी काम में व्यस्त रखें। आगे बढ़ने का प्रयास करें ताकि अपने दिल और दिमाग को हल्का रख सकें।
कुछ बातों को समझना होगा आपको:-
- एक बात को गांठ बांध लें कि जीवन में कुछ भी परमानेंट नहीं है, न रिश्ते, न संबंध, न लोग, न चीजें, सब कुछ बदलता रहता है। इसे स्वीकार करने के लिए स्वयं को तैयार करें।
- पुराने घावों को भरने के लिए समय लगता है। इस बीच नए रिश्ते, नई इमोशंज को हावी न होने दें। जल्दबाजी में दूसरा कदम गलत हो सकता है।
- अपनी खुशियां ज्यादा जरूरी हैं। दूसरे की गलती की वजह से अपनी खुशियां खराब न करें।
- दूसरे से उम्मीद कम से कम रखें। ज्यादा उम्मीदें निराशा ही देती हैं। लंबे रिलेशंस के लिए उम्मीद का दायरा कम से कम बनाएं।
- किसी के साथ रिलेशनशिप में आपने उसे क्या दिया और बदले में उसने क्या दिया, उस पर विचार करें जो आपने दिया, वो अपनी इच्छा से दिया, जो उसने दिया, उसने अपनी इच्छा से यह सोच आपको खुश रखेगी। सुनीता गाबा(उर्वशी)