’मम्मी, मेरी पेंसिल नहीं मिल रही है। अब मैं स्कूल कैसे जाऊं?‘
’मेरी सांइस की बुक कहां है?‘
’मम्मी मेरी स्कूल डायरी ढूंढ दो न।‘
रोज सुबह-सुबह स्कूल जाते समय यही सब होता है। स्कूल जाने की जल्दी, नाश्ता करने में हड़बड़ी, स्कूल बस छूट जाने का डर, यही सब रोज सुबह होता है हर घर में। इसी चक्कर में बच्चे और माता-पिता कुछ न कुछ भूल जाया करते हैं।
जल्दबाजी में बच्चों को स्कूल के लिए वे चीजें नहीं मिलती जो उन्हें रात को संभालकर रख लेनी चाहिए। तभी तो रोज सुबह उन्हें इन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन परेशानियों का कारण है उन चीजों को उनकी जगह पर न रखना।
बच्चा जब स्कूल जाने लगता है तो उस पर कई तरह की जिम्मेदारियां आ जाती हैं। उसकी दिनचर्या में कई तरह के परिवर्तन आ जाते हैं जिनसे उसके पुराने कार्यकलाप प्रभावित होते हैं। जैसे-जैसे वह बड़ी कक्षा में आता-जाता है, उसकी जिम्मेवारियां बढ़ जाती हैं। उस पर होमवर्क और पढ़ाई का बोझ भी बढ़ता है। शिक्षकों से उसका सामंजस्य भी समय लेता है। ट्यूशन, टेस्ट, एक्स्ट्रा-क्लास, गेम्स, हर चीज में उसे बंटना पड़ता है। उसके ऊपर इतना दबाव हो जाता है कि वह समझ नहीं पाता कि इन सबमें कैसे तालमेल बिठाए।
पढ़ाई के दबाव में बच्चा अपनी चीजों को व्यवस्थित नहीं रखता बल्कि और लापरवाह हो जाता है। अगर उसे सब कुछ संभालकर रखने के लिए कहा भी जाता है तो उसका यही जवाब होता है कि उसके पास इस सबके लिए समय नहीं और इनसे उसे कोई परेशानी नहीं, फिर वह इन सबके पीछे अपना समय क्यों बर्बाद करें?
ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे को समय दें। उसके साथ मिलकर उसका कमरा और सामान ठीक करें। तभी तो वह भी सीखेगा। यदि आप उसे सिर्फ आदेश देंगे तो वह उसे नहीं मानेगा। उसके साथ मिलकर उसकी सहायता करेंगे तो ऐसा करने की उसे आदत भी पड़ेगी और वह आपसे सीखेगा भी।
बच्चे के कमरे में चीजों का स्थान निर्धारित करें जिससे उसे रोज कुछ भी ढूंढने में परेशानी न हो। उसे वे चीजें यथास्थान ही रखना सिखाएं। धीरे-धीरे उसे इन चीजों की आदत हो जाएगी। यदि वह कमरे में कुछ भी फाड़कर फैलाये तो उसे सिखाएं कि रद्दी कागज को वह कमरे में न फैलाए बल्कि कूड़ेदान में जाकर डाले। इससे उसे सफाई का ज्ञान होगा।
बच्चा अपना हर काम स्वयं नहीं कर सकता किंतु आप उसे सिखा सकती हैं। कुछ काम स्वयं करें, बाकी उसे भी सिखाएं। उसके कपड़ों को अलमारी में संभालकर आप रखें। स्कूल से आने पर उसकी यूनिफार्म,टाई बेल्ट आदि निर्धारित स्थान पर आप ही रखें। ड्रेस, रूमाल आदि गंदे कपड़ों को उसे बाथरूम में रखने को दें। उसकी किताबें, खिलौने आदि सही तरीके से रखना बतायें जिससे वह सब रखना उसकी ड्यूटी बन जाए। उसके काम करने पर उसे शाबाशी जरूर दें। इससे बच्चे को मानसिक सपोर्ट मिलता है। उसे अपने कमरे या अलमारी की देखभाल करना सिखाएं।
बच्चा कोई काम किस तरह कर रहा है, उस पर नजर भी रखें ताकि वह अकेले में काम और फैला न दे। जब भी बच्चे की कॉपी, किताबें चिपकानी या संवारनी हाे तो, बच्चे को पास में बैठाकर सिखाएं। छुट्टी के दिन उन्हें अपनी चीजों की साफ-सफाई करने के लिए प्रेरित करें। यदि बच्चे के लिए अलग से कोई कमरा न हो तो घर में एक कोना उसके लिए रखें जिसमें वह अपना मानकर संवार सके जिसमें उसे कोई रोके-टोके नहीं। शिखा चौधरी(उर्वशी)