एक चर्चित युवा लेखक चिंतन के पास प्रतिभा के साथ-साथ नाम शोहरत पैसा सभी कुछ था। जब मुस्कान से उसका विवाह हुआ, मुस्कान को अपनी किस्मत पर जहां गर्व था, उसकी सखियों को उसके भाग्य से ईर्ष्या ।
पति के रिजर्व्ड नेचर को देखते हुए मुस्कान स्वयं को तसल्ली देती कि शायद कुछ समय के बाद ये खुलकर बातचीत करने लगेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। समय गुजरता रहा लेकिन चिंतन के रवैय्ये में बदलाव नहीं आया। वह अध्ययन मनन करता हुआ अक्सर अपने में ही डूबा रहता। मुस्कान पति में कोई ऐब नहीं ढूंढ पाई थी मगर यह भी सच था कि वह पति के साथ खुश भी नहीं थी।
शुरू से बेहद पढ़ाकू सुपर इंटेलिजैंट उदित ने अपने नाम के साथ न जाने कितनी डिग्रियां जोड़ ली थीं । यूनिवर्सिटी का टॉपर, गोल्ड मेडलिस्ट उदित अपनी प्रतिभा के कारण हर जगह सम्मान पाता सिवाय अपनी चंचल खूबसूरत बीवी के। बीवी को वो महाबोर नजर आता था जिसे औरत के मनोविज्ञान की जरा सी भी समझ नहीं थी।
नई नवेली पत्नी के भी पति को लेकर कुछ अरमान होते हैं, कुछ आशाएं होती हैं, इसका जरा भी अहसास नहीं था उदित को। किताबों में डूबे रहकर वो केवल एक रोबोट बनकर रह गया था। प्यार इजहार भी मांगता है। मैं सारा जीवन ऐसे नीरस व्यक्ति के साथ कैसे गुजार सकती हूं ।
वैवाहिक जीवन में आपसी जुड़ाव के लिये प्यार, विश्वास व कदम-कदम पर समझौतों की दरकार होती है। आपसी समझ, अंडरस्टैंडिंग की जरूरत होती है।अत्यंत प्रतिभाशाली होने पर व्यक्ति में अहंकार आ जाता है । ऐसे में उनमें समझौते की भावना व सहनशीलता कम होती है इसी तरह व्यावहारिकता भी उनमें कम होती है। दुनिया में रहना है तो दुनियादारी तो निभानी ही होगी, इस बात से अनभिज्ञ वे शोहरत और प्रसिद्धि के जुनून में कई बार अपने कर्त्तव्यों से विमुख हो जाते हैं।
बीवी लाख कर्मठ, सपोर्टिव और समझदार हो, आखिर उसकी भी अपनी लिमिटेशंस हैं। घर-गृहस्थी के झमेले कम नहीं होते। वो अकेली ही कहां तक भागदौड़ कर सकती है। पति भी उसके काम में हाथ बंटाये, घर चलाने की जिम्मेदारी शेयर करे। अगर वो ऐसा चाहती है तो गलत नहीं है।
प्रतिभावान व्यक्तियों की समाज में बहुत इज्ज़त होती है। उनके प्रशंसकों की काफी तादाद होती है। वे समाज और देश के लिए अनमोल हैं लेकिन वैवाहिक फ्रंट पर, अपने व्यक्तिगत जीवन में वे अक्सर असफल सिद्ध होते हैं। वे पत्नी के मन को नहीं समझ पाते।
कई बार पति की इमेज बनी रहे, इस फेर में पत्नी भीतर ही भीतर घुटती रहती है लेकिन पति से कुछ कह नहीं पाती। कभी संस्कार आड़े आ जाते हैं। इसके विपरीत असहनशील अति आधुनिक कमाऊ स्त्रियां चार दिन में ऐसी स्थिति में पति से तलाक लेती नजर आती हैं ।
नारी कितना सहे, कितना नहीं, यह एक अलग विषय है। सहनशीलता के गुण को एक हद तक नकारा नहीं जा सकता। जहां ज्यादती सहना भी गलत है, वहीं एकदम से बिना सोचे समझे आपा खो देना भी गलत कहा जाएगा।
टॉलस्टॉय जैसे महान लेखक व विचारक अपने वैवाहिक जीवन को सफल नहीं बना पाए। इसी तरह हैवलॉक एलिस जैसे विद्वान दार्शनिक भी पत्नी के साथ तालमेल नहीं बैठा पाए। उनकी पत्नियों को पति से जो शिकायतें थीं, वही शिकायतें अन्य प्रतिभावान पतियों की पत्नियों को भी होती हैं ऐसा माना जा सकता है।
प्रतिभा के धनी पति जानबूझ कर पत्नी की उपेक्षा नहीं करते लेकिन वे अपने कार्य में इतना डूब जाते हैं कि पत्नी के प्रति फर्ज उनके लिए सेकंडरी हो जाता है। कहते हैं ऐसे पतियों का पत्नी आदर तो कर सकती है लेकिन प्यार वो 'रफ टफ हीमैन' से ही करती है।
विवाह की सफलता के लिए न तो शारीरिक सौंदर्य जरूरी है, न उच्च आदर्श बल्कि सीधी सादी कुछ आम बातें हैं जो गरीब अमीर कम या ज्यादा उम्र के पढ़े लिखे या अनपढ़, कोई भी फॉलो कर जीवन साथी को संतुष्ट रख सकता है। उषा जैन 'शीरीं'(उर्वशी)