गलत प्रतिक्रिया AI Generated Image
अपराजिता

गलत प्रतिक्रिया से बिगड़ती छवि और रिश्ते : सच बोलें, पर संवेदनशीलता के साथ

रंग, रूप या स्टेटस पर कटाक्ष और झूठी शान दिखाने की होड़ हीनभावना और फ्रस्ट्रेशन बढ़ाती है; विनम्र रहते हुए भी अपनी सीमाएं तय कर समझदारी से प्रतिक्रिया देना सीखें।

क्या आपको इस बात का जरा भी अहसास है कि आपकी गलत प्रतिक्रिया आपकी छवि बिगाड़ देती है और दूसरों को दुख पहुंचाकर रिश्तों में कड़वाहट घोल सकती है। औरतों को अपने रूप की प्रशंसा सुनना बहुत अच्छा लगता है। अपने रूप को लेकर वे जरा सी भी आलोचना बर्दाश्त नहीं कर सकती।

अब सांवली सलोनी रिमी की बात लें। प्रतिभाशाली होने के साथ उसके नयन नक्श फिगर वगैरह सब ठीकठाक थे लेकिन रंग को लेकर उसमें घोर कॉम्पलेक्स घर कर गया था। एक दिन पड़ोस वाली आंटी ने उसे देखकर कहा-आज तो उल्टे तवे की रंगत सीधे तवे से मेल खा रही है, ये कहकर वो अपनी ही बात पर हंसने लगी। रिमी को बात चुभ गई। घर आकर वो आंसू पोंछती रही। कुछ दिन बाद ही जब रिमी की प्रिय सखी रमा ने उसे कांपलीमेंट देते हुए कहा ’रिम्मी तेरा रंग तो निखरता जा रहा है, यू लुक सो लवली‘। कहना न होगा रिमी सारा दिन खुशी से चहकती रही।

न झूठ बोलें, न कड़वा सच:-

माना आप सामने वाले के वैल विशर हैं। उसे झूठ बोलकर मिसगाइड नहीं कर सकती और करना भी नहीं चाहिए लेकिन इसके लिए आप उसका एकदम से दिल तोड़ दें, यह भी ठीक नहीं।

अगर मात न खानी हो :-

जीवन में सभी वनअप होकर रहना चाहते हैं जो हर किसी के लिए संभव नहीं है और यही बात उन्हें चोट पहुंचाती है, उनमें फ्रस्ट्रेशन पैदा करती है। खाली पीली हर समय झूठी शान दिखाकर कई लोग अपने को सुपीरियर दिखाने की होड़ लगाये रहते हैं। दरअसल ऐसे लोग हीनभावना के मारे होते हैं। ऐसा करके वे अपनी इमेज बिगाड़ते हैं।

आप ऐसे में लाख विनम्रता बरतते हुए समझदारी से बातें करें लेकिन आप भी आखिर इंसान हैं। कब तक दूसरे की ऊंची-ऊंची सुनते रहेंगे। आप डाउन होती रहेंगी तो इसका आप के मन पर बुरा असर पड़ेगा। आपका आत्मविश्वास डगमगा जाएगा, मनोबल कमजोर पड़ने लगेगा, इसलिए ऐसे लोगों से डील करना भी आपको आना चाहिए।

जरूरी नहीं है कि आप हमेशा दूसरों की खुशी सोचकर ही बोलें। दूसरे गलत बातों से भी खुश होते हैं। अगर वे सैडिस्ट हैं तो आप क्यों उनके लिए सैडिस्टिक सुखानुभूति का जरिया बनें? अपना दुखड़ा हर समय रोते रहने की आपको आदत नहीं है मगर सामने वाला है कि ’तसल्ली देने का जिन्हें शौक था, लब पर तबस्सुम देख जल गए‘। इसे फॉलो करते हैं तो उनके जलने की परवाह छोड़ दें। प्रतिक्रिया दें अपने विवेक से, केवल दूसरों की खुशी सोचकर ही नहीं।

उषा जैन ’शीरीं‘ (उर्वशी)

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