प्रेम विवाह में दरार क्यों? AI Generated
अपराजिता

प्रेम विवाह में दरार क्यों? आकर्षण से जिम्मेदारी तक बदलते रिश्तों की पड़ताल

प्रेम-विवाह में शुरुआती शारीरिक आकर्षण और आज़ादी, शादी के बाद नून-तेल-लकड़ी की जिम्मेदारियों से टकराकर क्यों टूटने लगते हैं रिश्ते, कहाँ चूक जाते हैं प्रेमी-प्रेमिका?

यूं तो शादी के अनेक तरीके हैं लेकिन मुख्यतः पारंपरिक विवाह या अरेंज मैरिज ही लोकप्रिय है। प्रेम दोनों में होता है लेकिन अलग-अलग तरह से। प्रेम-विवाह में औरत आदमी में पहले प्रेम होता है फिर वे शादी करते हैं। अरेंज मैरिज में पहले शादी होती है, फिर पति-पत्नी के बीच धीरे-धीरे प्रेम पनपता है।

प्रेम और शादी दो अलग-अलग चीजें हैं लेकिन उनका एक होना भी जरूरी है। अगर पति-पत्नी के बीच में प्रेम नहीं होगा तो उनका दांपत्य चल ही नहीं सकता। सवाल उठता है जब मर्द औरत प्रेम होने पर शादी करते हैं फिर भी उनका दांपत्य असफल क्यों हो जाता है ? प्रेमी-प्रेमिका जो एक-दूसरे के लिए जीने मरने की कसमें खाते हैं क्यों पति-पत्नी बनने के बाद एक दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं ?

प्रेम विवाह में प्रायः शारीरिक आकर्षण मुख्य होता है। मर्द-औरत एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं।

पारंपरिक विवाह करने से पहले लड़का-लड़की का सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक स्तर देखा जाता है। धर्म-जाति, रहन-सहन, रीति रिवाज आर्थिक स्तर, खान-पान, पहनावा सब बातों पर ध्यान दिया जाता है। सब बातें देखने के बाद शादी की जाती है लेकिन प्रेम-विवाह में ऐसा नहीं होता । प्रेम विवाह में प्रायः शारीरिक आकर्षण मुख्य होता है। मर्द-औरत एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं। उनमें प्रेम होता है और ज्यादातर मामलों में शादी से पहले शारीरिक संपर्क भी हो जाते हैं। मर्द औरत प्रेमी-प्रेमिका रहते हैं, तब तक उन पर कोई जिम्मेदारी नहीं होती लेकिन पति-पत्नी बनने पर ऐसा नहीं होता।

दांपत्य का नाम है नून, तेल, लकड़ी

दांपत्य का नाम है नून, तेल, लकड़ी। पति-पत्नी को अपनी गृहस्थी ही नहीं चलानी पड़ती, सामाजिक बंधन भी निभाने पड़ते हैं। अलग धर्म, अलग जाति, अलग प्रांत या देश के होने के कारण पति-पत्नी के रहन-सहन, पहनावे, खान-पान, रीति रिवाज, आचार-विचार सभी चीजों में अंतर होता है।

प्रेमी-प्रेमिका जब पति-पत्नी बन जाते हैं तो उनको साथ रहना पड़ता है। फिर बात-बात पर उनमें तुनक मिजाजी चालू हो जाती है जो धीरे-धीरे झगड़े का रूप ले लेती है। आये दिन का झगड़ा पति-पत्नी के बीच दूरी बढ़ाने लगता है और नौबत संबंध विच्छेद तक जा पहुंचती है ।

दोषी सिर्फ एक नहीं

प्रेम-विवाह असफल होने के लिए दोषी सिर्फ एक नहीं हो सकता। पति-पत्नी दोनों ही होते हैं। अगर वे समझदारी से काम लें तो दाम्पत्य टूटने से बच सकता है। इसके लिए जरूरत है समझौते और झुकने की। पति-पत्नी के बीच जो भी विरोधाभास हो,उनको आपसी समझ-बूझ से दूर किया जा सकता है। झगड़ने से बेहतर है पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे के अनुरूप ढलने का प्रयास करें। ऐसा करने पर उनका दांपत्य टूटने से बच सकता है। (उर्वशी)

SCROLL FOR NEXT