आखिर शादी क्यों नहीं करना चाहती लड़कियां? Ai Generated Image
अपराजिता

जब तक न मिले सम्मान और बराबरी, क्यों करें शादी? नई पीढ़ी की लड़कियाँ समाज से पूछ रही हैं कड़े सवाल

शिक्षा, आत्मनिर्भरता और बदलती सोच ने लड़कियों को दिया नया नजरिया, अब वे शादी को मजबूरी नहीं बल्कि बराबरी और सम्मान पर आधारित साझेदारी के रूप में देखना चाहती हैं

कुछ साल पहले तक लड़कियों की शादी एक निश्चित उम्र में हो जाना सामान्य बात मानी जाती थी। परिवार वाले भी यही सोचते थे और समाज भी लेकिन आज स्थिति बदल रही है। कई लड़कियाँ शादी देर से कर रही हैं, कुछ शादी नहीं करना चाहतीं और कुछ केवल सही जीवनसाथी मिलने का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?

सबसे बड़ा कारण है शिक्षा और आत्मनिर्भरता

सबसे बड़ा कारण है शिक्षा और आत्मनिर्भरता। आज लड़कियाँ पढ़-लिख रही हैं, नौकरी कर रही हैं और अपने पैरों पर खड़ी हैं। पहले आर्थिक सुरक्षा के लिए शादी को जरूरी माना जाता था, लेकिन अब बहुत सी लड़कियाँ खुद अपनी जिम्मेदारी उठा सकती हैं। इसलिए वे केवल समाज के दबाव में शादी नहीं करना चाहतीं।

दूसरा कारण है शादीशुदा जीवन के बदलते अनुभव

दूसरा कारण है शादीशुदा जीवन के बदलते अनुभव। आज लड़कियाँ अपने आसपास कई ऐसे परिवार देखती हैं जहाँ पति-पत्नी के बीच झगड़े होते हैं, तलाक होते हैं, घरेलू हिंसा होती है या महिलाओं को सम्मान नहीं मिलता। ऐसे उदाहरण देखकर उनके मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या शादी वास्तव में खुशहाल जीवन की गारंटी है?

तीसरा कारण है स्वतंत्रता

तीसरा कारण है स्वतंत्रता। बहुत सी लड़कियाँ अपने फैसले खुद लेना चाहती हैं। वे अपने करियर, सपनों, यात्राओं और रुचियों को महत्व देती हैं। उन्हें डर रहता है कि शादी के बाद उनकी स्वतंत्रता कम हो सकती है या उन पर अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ आ सकती हैं।

वे ऐसा जीवनसाथी चाहती हैं जो उन्हें बराबरी का दर्जा दे, उनकी भावनाओं को समझे और उनके सपनों का सम्मान करे

एक कारण यह भी है कि आज की लड़कियाँ समझौते के बजाय सम्मान चाहती हैं। वे ऐसा जीवनसाथी चाहती हैं जो उन्हें बराबरी का दर्जा दे, उनकी भावनाओं को समझे और उनके सपनों का सम्मान करे। यदि ऐसा साथी नहीं मिलता तो वे जल्दबाजी में शादी करने के बजाय इंतजार करना बेहतर समझती हैं।

सोशल मीडिया और इंटरनेट ने भी सोच बदली है। अब लड़कियाँ दुनिया को करीब से देख रही हैं। वे जानती हैं कि जीवन के कई रास्ते हो सकते हैं। शादी उनमें से एक रास्ता है, लेकिन अकेला रास्ता नहीं।

हालांकि यह कहना गलत होगा कि आज की लड़कियाँ शादी नहीं करना चाहतीं। सच तो यह है कि अधिकांश लड़कियाँ शादी करना चाहती हैं, लेकिन ऐसी शादी जो सम्मान, विश्वास, प्यार और बराबरी पर आधारित हो। वे केवल इसलिए शादी नहीं करना चाहतीं क्योंकि समाज उनसे इसकी उम्मीद करता है।

समस्या शादी से नहीं है, बल्कि उस सोच से है जो आज भी लड़कियों से ज्यादा त्याग और समझौते की अपेक्षा करती है।

इसलिए समस्या शादी से नहीं है, बल्कि उस सोच से है जो आज भी लड़कियों से ज्यादा त्याग और समझौते की अपेक्षा करती है। अगर परिवार और समाज लड़कियों को बराबरी, सम्मान और सुरक्षा का भरोसा दें, तो शादी के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत होगा। आखिरकार हर व्यक्ति को यह अधिकार होना चाहिए कि वह अपने जीवन के बारे में स्वयं निर्णय ले। शादी एक खूबसूरत रिश्ता है लेकिन तभी जब उसमें दोनों पक्षों की खुशी, सम्मान और सहमति शामिल हो।

डॉ. शैलेश शुक्ला (युवराज)

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