गृहिणी के लिए सब से बड़ा सिरदर्द है रोजमर्रा के ऊबाऊ थका देने वाले कामकाज। दूध उबालो, दही जमाओ, तीन चार टाइम किचन में बर्तनों की खटर पटर कर के नाश्ता खाना बनाओ। घर की देखभाल, कपड़ों का अंबार छांटते-छांटते कभी तो मर जाने को जी चाहता है। ऐसा फील करने का कारण है इस कार्य भार का गहरा तनाव तथा स्ट्रेस का बढ़ता लेवल ।
आज उन महिलाओं की तादाद काफी है जिन पर घर बाहर की दोहरी जिम्मेदारी है। साथ ही बच्चों की पढ़ाई का जबर्दस्त प्रेशर है। यही आलम पुरुषों का भी है। गला काट प्रतियोगिता, गवर्नमेंट की नित नई पॉलिसीज, महत्वाकांक्षाओं का बोझ, ऑफिस टेंशन, दिखावे की दुनिया में स्टेटस मेंटेन करने की जद्दोजहद, बाजारवाद, इन सब कारणों से स्ट्रेस लेवल तो बढ़ेगा ही।
घरेलू कामों को अगर आपको एंजाय करना आता है तो नथिंग लाइक देट। घरेलू काम आपको तनाव से राहत दिला सकते हैं। बस गुनगुनाते, मजे लेते हुए उन्हें करिए। सब्जी काटने जैसी मामूली क्रिया से भी तनाव दूर हो सकता है। खाने की खुशबू मूड बढ़िया कर सकती है ।
बेसिकली हर औरत घरेलू ही होती है । जमाने की हवा लगने और वुमन एमपावरमेंट के नशे में वो भले ही कहती रहे कि घरेलू स्त्रियां गृहकार्यों में पिसकर अपना जीवन बर्बाद करती हैं लेकिन यह सच नहीं है। एक खुशहाल घरेलू जिन्दगी जीवन का सबसे बड़ा सुख है। घर को घर बनाती है औरत।
घर को संजाना संवारना, ठीक से व्यवस्थित रखना, जरूरत की चीजों को स्टोर करके घर परिवार की जरूरतों का ध्यान रखना आदि वे बातें हैं जो उसके व्यक्तित्व को संपूर्णता प्रदान करती हैं। घर को संसार यूंही नहीं कहा गया है। देखा जाए तो घर अपने आप में एक संपूर्ण संसार ही है जिसके आप मालिक हैं। आप घर के बगैर रहने की कल्पना भी नहीं कर सकते।
यह आपके व्यक्तित्व का विस्तार है। यहां आपके पास काम के ऑप्शन ही ऑप्शन हैं। आपके हर तरह के रुझान को पूरा करने के अवसर हैं, सफाईमेनिया हो या घर को ब्यूटीफाई करने जैसा रचनात्मक शौक। पौधों से, फूलों से प्यार हो तो ये भी खुशी और सुकून देता है। आपके मेहनत से लगाये पौधों में जब मन को उल्लसित करने वाले फूल खिलते हैं तो आपके एंडोर्फिन आपका मूड एलीवेट कर देते हैं।
फिर हर काम के लिए सुविधाजनक उपकरण इलेक्ट्रिकल गजेट्स हैं जो मेहनत और समय दोनों बचाते हैं। जहां गृहकार्य मजबूरी बन जाता है और टेंशन देने लगता है, कुछ मौजमस्ती आउटिंग जरूरी हो जाती है लेकिन मौज मस्ती और आउटिंग भी बोर कर सकती है। तब सुकून देते हैं घर में छोटे-छोटे पसंदीदा कार्य। हर व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य जब खुशी की तलाश ही है तो फिर वह घर की सुरक्षित चारदीवारी में ही क्यों न ढूंढी जाए। (उर्वशी)