ऐसे तैयार करें छोटी सी बगिया सांकेतिक चित्र इंटरनेट से साभार
अपराजिता

ऐसे तैयार करें छोटी सी बगिया

बड़े शहरों में कोठियां या बंगले तो एक सपना सा लगता है। अधिकतर घर अपार्टमेंट्स

में होते हैं जहां न तो जमीन अपनी होती है न छत। यदि आप हरियाली के शौकीन हैं

तो अपने शौक को पूरा करने के लिए कुछ न कुछ हल तो ढूंढेंगे ही न कि निराश

होकर अपना मन मन मार लेंगे।

बड़े घर तो बहुत कम लोगों के पास होते हैं जहां पर आप लॉन का आनंद उठा सकते हैं

पर निराश न हों। आप अपने फ्लैट में भी छोटा सा गार्डन तैयार कर अपने शौक को

जिंदा रख सकते हैं, साथ ही साथ घर को आकर्षक लुक भी दे सकते हैं। आइए

जानिए घर पर छोटी सी बगिया को कैसे तैयार किया जाए।

घर की बाल्कनी में गमलों में सीजनल पौधे लगवाएं ताकि घर के बाहर हरियाली भी

रहे और घर आकर्षक भी लगे। गमलों को ऐसे स्थान पर रखें जहां बाल्कनी में पौधों

पर धूप आ सके। पौधे खरीदने से पहले उनकी प्रकृति के बारे में जानकारी जरूर लंे

ताकि पौधे खिले रह सकें।

यदि बाल्कनी बड़ी हो तो उसके एक ओर गमले रखें ताकि बाकी बाल्कनी का प्रयोग

आप कर सकें। ऐसे में ऊंचे गमले पीछे रखें और छोटे आगे रखें। सबसे आगे बिल्कुल

छोटे चिलमचीनुमा गमले भी रख सकते हैं।

कुछ पौधे ऐसे हैं जो सारा साल हरे रहते हैं। उन्हें अपने गार्डन में जरूर स्थान दें जैसे

मनीप्लांटस, एलोवेरा फर्न, करी पत्ता, तुलसी, पुदीना, एस्पेरेगस, मोन्सटेरा आदि। इन्हें

आप अलग आकार के गमलों में भी लगा सकते हैं। आजकल विभिन्न आकार के

गमले बाजार में उपलब्ध हैं।

यदि आप ग्राउंडफ्लोर पर हैं और घर के बाहर जो कच्ची जमीन हो, कुछ पौधे उस

जमीन पर लगा दें, कुछ गमलों में और कुछ स्थान खाली छोड़कर उसमें घास लगा दें

ताकि छोटा सा गार्डन या लॉन आपके घर के बाहर बन जाए। यह ध्यान रखें कि

पौधे खिड़की के एकदम पास न रखें। थोड़ी सी दूरी बना कर रखें।

बालकनी भी छोटी हो और घर भी ग्राउंड लेवल पर न हो, ऐसे में यदि छत आपके

पास हो तो आप टैरेस गार्डन बना सकती हैं। टैरेस गार्डन इस तरह से प्लान करें कि

छत का सुख भी आप उठा सकें, विशेषकर सर्दियों में धूप लेने के लिए।

घर के बाहर बालकनी और छत्त के अतिरिक्त आप घर के अंदर भी कुछ इनडोर प्लांट

रख कर घर में हरे पौधों का आनंद भी उठा सकती हैं। बस इन्हें आवश्यकता होती है

थोड़ी सी अधिक देखभाल की।

ऐसे पौधों को सप्ताह में एक बार खुली हवा में रखना होता है और देखना होता है कि

उस स्थान पर सूरज की सीधी रोशनी न पड़े।

इन्डोर प्लॉटस में आप मनीप्लांट, फर्न,एरिका पाम आदि लगा सकते हैं। इन्हें सप्ताह

में दो बार पानी दें।

पौधों पर पानी फव्वारे से दें। इससे पौधों पर पड़ी मिट्टी भी धुल जाती है और पौधों

की जड़ें भी मिट्टी नहीं छोड़ती। डिब्बे या पाइप से पानी डालने पर पौधों की जड़ें

उखड़ने का डर रहता है और मिट्टी के गमलों से बाहर आने से बालकनी भी खराब

होगी।

हर सप्ताह या दस दिन में एक बार खुर्पी से हल्की हल्की गुड़ाई करनी चाहिए जिससे

नमी वाली मिट्टी को ताजा हवा लग जाती है और नमी में पैदा होने वाले कीड़े भी

नहीं पनपते। सूखे पत्तों को साथ-साथ अलग करते रहना चाहिए।

गर्मी में प्रतिदिन पौधों को पानी देना चाहिए और सर्दी में एक दिन छोड़कर। तीन से

चार माह के बाद सभी गमलों से मिट्टी निकालकर उसमें खाद मिलाकर पुनः गमलों

में भर देनी चाहिए ताकि उन्हें उचित खुराक खुराक मिलती रह सके। थोड़ी सी मेहनत

और देखभाल से आप गाडर्निंग के शौक को पूरा कर सकते हैं और अपनी प्यारी सी

बगिया को हरा भरा रख सकते हैं। सुनीता गाबा(उर्वशी)

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