यह प्रकृति का है प्रतिकार
मानव पर है धिक्कार,
जैसी करनी, वैसी भरनी
आज मानव है लाचार I
वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण
विकास की अंधी दौड़ में,
प्रकृति ही है दरकिनार
इसी का आज है पलटवार I
जंगल कटे, बांध बने
नए विकल्प की तलाश में,
बदल दिया प्राकृतिक आकार
इसी का आज है प्रहार I
पहाड़ न छोड़ा, पर्वत न छोड़ा
अपनी खुशी के लिए,
सारा जहां पर किया अत्याचार
इसी का आज है ललकार I
इस घटना ने जता दिया
जन-जन को चेता दिया,
मानव करो गंभीर विचार
प्रकृति है जीवन का आधार I