तालिबान ने भारत को दिया कड़ा संदेश, कहा…

नई दिल्ली : अफगानिस्तान में चीन की दखलअंदाजी से तालिबान को कोई दिक्कत नहीं है और वह खुद चाहता है कि चीन यहां बढ़चढ़ कर भाग ले। तालिबान ने कहा कि चीन अफगानिस्तान के निर्माण में भाग ले सकता है और अन्य आवश्यक क्षेत्रों में सहायता प्रदान कर सकता है। इस तरह से तालिबान ने भारत की चिंताओं को सिरे से खारिज कर दिया, जो इस क्षेत्र में बीजिंग की बड़े पैमाने पर निवेश परियोजनाओं से उपजा है। तालिबानी प्रवक्ता सुहेल शाहीन ने कहा कि भारत की कुछ चिंताएं उचित नहीं हैं और न ही वे स्वीकार्य हैं।
अफगानिस्तान से अमेरिकी और नाटो सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान सरकार आने वाले 6 महीनों में संकटग्रस्त देश में बड़े निवेश के लिए चीन की ओर मुंह पाए खड़ी है। तालिबान को उम्मीद है कि ऐसे वक्त में चीन ही उसका एकमात्र सहारा बन सकता है और बीजिंग ने भी कुछ ऐसा ही भरोसा दिलाया है। चीन ने स्पष्ट किया है कि वह तालिबानी राज में अफगानिस्तान की सार्वभौमिकता और अखंडता का सम्मान करेगा।
तालिबानी प्रवक्ता सुहेल शाहीन ने पूछा कि हमें अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है और अब जब चीन हमारे लोगों के लिए रोजगार पैदा करने के लिए अफगानिस्तान के निर्माण में हमारी मदद करने के लिए आगे आया है तो इसमें गलत क्या है? उन्होंने कहा कि तालिबान की साझा स्वार्थ की नीति है और कहा कि इस गंभीर स्थिति में यह बहुत महत्वपूर्ण है कि चीन अफगानिस्तान की मदद के लिए आगे आए।
उन्होंने कहा कि चीन अफगानिस्तान के निर्माण में भी भाग ले सकता है और अन्य आवश्यक क्षेत्रों में सहायता प्रदान कर सकता है। इसके बाद दोनों देश पारस्परिक रूप से लाभप्रद द्विपक्षीय समझौतों में प्रवेश कर सकते हैं जो पारस्परिक सम्मान के माध्यम से दोनों देशों के हितों की सर्वोत्तम सेवा करते हैं। इससे पहले अन्य प्रवक्ता जबिउल्लाह मुजाहिद ने यह इच्छा व्यक्त की थी कि तालिबान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में शामिल होना चाहता है।
निक्केई एशिया न्यूजपेपर ने सूत्रों के हवाले से कहा कि बीजिंग और तालिबान के बीच निवेश को लेकर मौखिक समझौते हुए हैं। सूत्रों ने कहा कि तालिबान सरकार को वैश्विक मान्यता मिलने के बाद चीन युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निर्माण शुरू कर देगा। इसी क्रम में पिछले हफ्ते अफगानिस्तान के पड़ोसियों- चीन, ईरान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की एक आभासी बैठक की मेजबानी पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने की थी।
बैठक के दौरान ही चीन ने अफगानिस्तान को अनाज, सर्दी की आपूर्ति, टीके और दवाओं सहित 31 मिलियन अमरीकी डॉलर की आपातकालीन सहायता का वादा किया था। बता दें कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC चीन की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया के तटीय देशों में चीन के ऐतिहासिक व्यापार मार्गों को नवीनीकृत करना है। इतना ही नहीं, इस योजना के साथ बीजिंग का लक्ष्य संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए पाकिस्तान और मध्य और दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव का विस्तार करना है।

 

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