अमेरिकी अदालत ने इन दो एच-1बी नियमों पर रोक लगाई

वाशिंगटन : हजारों भारतीय पेशेवरों और शीर्ष अमेरिकी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को एक बड़ी राहत देते हुए एक अमेरिकी अदालत ने मंगलवार को ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित दो एच-1बी नियमों पर रोक लगा दी है। ये प्रस्ताव विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अमेरिकी कंपनियों की क्षमता को बाधित करते थे।

क्या है एच-1बी वीजा 

एच-1बी वीजा एक गैर आव्रजक वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को विशेष व्यवसाय, जिनमें सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होती है, के लिये विदेशी कर्मचारियों को रखने की इजाजत देता है। अमेरिका प्रतिवर्ष 85 हजार एच-1बी वीजा जारी करता है। आमतौर पर ये तीन साल के लिये जारी होते हैं और इन्हें नवीकृत कराया जा सकता है। करीब 6 लाख एच-1बी वीजाधारकों में से अधिकतर भारत और चीन से हैं।

सात दिसंबर से प्रभावी नियम अब अमान्य नहीं

नॉर्दर्न डिस्ट्रिक ऑफ कैलीफोर्निया के जिला न्यायाधीश जैफरी व्हाइट ने अपने 23 पन्नों के आदेश में ट्रंप प्रशासन की उस हालिया नीति पर रोक लगा दी जिसके तहत रोजगार प्रदाता को एच-1बी वीजा पर विदेशी कामगारों को महत्वपूर्ण रूप से ज्यादा मजदूरी देनी पड़ती। इसके अलावा, उन्होंने एक अन्य नीति को भी दरकिनार किया जो अमेरिकी टेक कंपनियों और अन्य रोजगार प्रदाताओं के लिये अहम माने जाने वाले एच-1बी वीजा की अर्हता को कम कर देती। इस फैसले के बाद गृह सुरक्षा विभाग का रोजगार और अन्य मुद्दों पर सात दिसंबर से प्रभावी होने वाला नियम अब अमान्य हो गया है। मजदूरी पर श्रम विभाग का आठ अक्तूबर को प्रभावी हुआ नियम भी अब वैध नहीं है।

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