हाफिज सईद की गिरफ्तारी पर ट्वीट कर बुरे फंसे अमेरिकी राष्ट्रपति

Tweeted on the arrest of Hafiz Saeed, US President

नई दिल्लीः पाकिस्तान ने बुधवार को मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को गिरफ्तार कर लिया। इसका श्रेय लेने की कोशिश में अमेरिकी राष्ट्रपति ऐसे ट्वीट कर बैठे, जिनसे साफ हो गया कि उन्हें पाकिस्तान और इस आतंकी के बारे में हकीकत का पता ही नहीं था। ट्रंप ने श्रेय लेते हुए कहा कि अमेरिका पाकिस्तान पर इस आतंकी को ​गिरफ्तार करने के लिए 2 साल से दबाव बना रहा था और आखिरकार इस आतंकी को 10 साल बाद गिरफ्तार कर लिया गया। अमेरिका के विदेश मामलों की समिति ने ही ट्रंप के इन ट्वीट की पोल खाेलकर रख दी। समिति ने कहा कि, मास्टरमाइंड सईद को ढूंढा नहीं गया है, बल्कि वह पिछले 10 साल से पाकिस्तान में आजाद घूम रहा ‌था।

बताते चलें कि यह गिरफ्तारी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के अमेरिका दौरे से चंद रोज पहले ही की गई है। इमरान 21 जुलाई से अमेरिका के दौरे पर जाएंगे और माना जा रहा है कि वे ट्रंप को कह सकें कि पाकिस्तान आतंकियों पर कार्रवाई कर रहा है, यही दिखाने के लिए आतंकी को गिरफ्तार किया गया है। हाफिज सईद को टेरर फंडिंग यानी आतंकवाद के लिए पैसा जुटाने के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है।

ट्रंप ने ट्वीट किया था कि

राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को ट्वीट किया था कि 10 वर्षों की तलाश के बाद मुंबई 26/11 का मास्टरमाइंड खतरनाक आतंकवादी हाफिज सईद को आखिरकार पाकिस्तान सरकार ने गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा था कि पिछले 2 वर्षों से पाकिस्तान सरकार पर हाफिज को ढूंढने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। ट्रंप के इस ट्वीट को देखकर ऐसा लगता है कि वह वास्तविकता से अनजान थे। शायद उन्हें इस बात का पता नहीं ‌था की हाफिज सईद पिछले 10 वर्षों से कहीं छिपा हुआ नहीं था, बल्कि पाकिस्तान में खुला घूम रहा था, रैलियां कर रहा था और अातंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए चंदा जुटा रहा था। इस दौरान वह कई बार जेल गया और छूट कर बाहर भी आया।

संसद के‌ निचले सदने ने ट्रंप को बताया सच

अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रेप्रजेंटेटिव) के विदेश मामलों की समिति ने राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट पर जवाब देते हुए कहा कि, आपकी जानकारी के लिए बता दें, पाकिस्तान पिछले 10 वर्षों से हाफिज को ढूूंढ नहीं रहा था। वह वहां आजाद था और दिसंबर 2001, मई 2002, अक्टूबर 2002, अगस्त 2006 में दो बार, दिसंबर 2008, सितंबर 2009 और जनवरी 2017 मेें कई बार गिरफ्तार और रिहा हुआ।’ आखिर में लिखा है, ‘उसे दोषी ठहराए जाने तक इंतजार कीजिए।’

पहले भी हुआ है ऐसा

ऐसा पहली बार नहीं है जब ट्रंप के बेखबरी का कोई मामला सामने आया है, बल्कि इससे पहले भी ऐसे अनेक मामलें सामने आ चुके हैं। फिलहाल में ही ट्रंप नोबेल पुरस्कार विजेता यजीदी कार्यकर्ता नादिया मुराद के काम एंव योगदान से भी अनजान थे। बुधवार को जब मुराद इराक के यजीदियों की मदद की अपील लेकर ट्रंप से मुलाकात करने पहुंची थीं। इस दौरान ट्रंप ने मुराद से पूछा, ‘और आपको नोबेल पुरस्कार मिला है? यह अद्भुत है। किस कारण से आपको यह मिला?’ इसके अलावा भी रोंहिग्याओं के एक प्रतिनिधि के मुलाकात ‌के दौरान भी ट्रंप बेखबर नजर आये थे।

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