आतंकवाद और उसके वित्त पोषण को रोकने के लिये वैश्विक समुदाय द्वारा मजबूत सामूहिक कार्रवाई की जरूरत : भारत

G Kishan Reddy

मेलबर्न : भारत ने पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए गुरुवार को कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति होनी चाहिए। उन्होंने आतंकवाद का समर्थन और आतंकवाद के लिये वित्तीय सहायता मुहैया कराने वालों के खिलाफ संयुक्त वैश्विक प्रयासों का आह्वान किया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने यहां ‘आतंकवाद के लिए कोई धनराशि नहीं’ (नो मनी फॉर टेरर) सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में अपने संबोधन में कुछ देशों द्वारा आतंकवादी संगठनों को दिये जा रहे मौन समर्थन पर भी भारत की चिंता जाहिर की। उन्होंने किसी देश का नाम लिये बगैर कहा कि आतंकवाद का समर्थन या उनके लिए धन उपलब्ध कराने वाले सभी लोगों के खिलाफ संयुक्त वैश्विक प्रयास किये जाने की जरूरत है।

गहरी चिंता का विषय

रेड्डी ने कहा कि यह गहरी चिंता का विषय है कि सामूहिक मंशा के बावजूद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पारित प्रस्ताव को ईमानदारी से लागू करने में कुछ सदस्य राष्ट्रों द्वारा स्पष्ट कमियां देखने को मिली हैं। पाकिस्तान को लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकवादी संगठनों को प्रायोजित करने और उनका समर्थन करने का दोषी ठहराया जाता है, ये आतंकवादी संगठन भारत में सैकड़ों हमलों के लिये जिम्मेदार हैं, जिनमें 2008 में मुंबई में हुआ 26/11 और 2001 में संसद पर हुआ हमला शामिल है।

आतंकवाद का पीड़ित

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में रेड्डी ने कहा कि भारत सीमा पार आतंकवाद का पीड़ित है और आतंकवाद को लेकर उसकी कतई बर्दाश्त नहीं करने की रणनीति है। इस सम्मेलन में 65 देश हिस्सा ले रहे हैं। मंत्री ने कहा कि 2011 में ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बावजूद अलकायदा से संबद्ध कई संगठन और सदस्य दुनिया के कई हिस्सों में अब भी मौजूद हैं और उन्होंने चेतावनी दी कि हाल में आईएसआईएस प्रमुख अबु बक्र अल बगदादी के खात्मे के बावजूद यह मान लेने की कोई गुंजाइश नहीं है कि ‘खलीफा’ बचे रहने के लिये संघर्ष नहीं करेगा।

चार बिंदुओं को शामिल करने का अनुरोध

रेड्डी ने सम्मेलन के प्रस्ताव में चार बिंदुओं को शामिल करने का अनुरोध किया- (1) आतंकवाद शांति, सुरक्षा और विकास के लिये सबसे बड़ा खतरा है, (2) संयुक्त राष्ट्र के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र संधि को अंतिम रूप देने में राष्ट्रों को तेजी लानी चाहिए, (3) एफएटीएफ मानकों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए और संरा सूची/एफएटीएफ का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए, (4) कट्टरवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिये चर्चा शुरू की जाए। मंत्री पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी के महानिदेशक वाई सी मोदी भी शामिल हैं।

संयुक्त वैश्विक प्रयास का आह्वान

रेड्डी ने कहा, ‘आतंकवाद और उसके वित्त पोषण को रोकने के लिये भारत कई देशों के साथ लगातार करीबी सहयोग बनाए हुए है। ऐसे सहयोग से कई आतंकी मॉडूल को कानून के दायरे में लाने के सफल अभियानों को अंजाम दिया गया है।’ आतंकवाद को न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बल्कि विकास के लिये भी सबसे बड़ा खतरा बताते हुए रेड्डी ने कहा कि आतंकवाद और उसके वित्त पोषण को रोकने के लिये वैश्विक समुदाय द्वारा मजबूत सामूहिक कार्रवाई की जरूरत है। ‘आतंकवाद के लिये धन नहीं’ सम्मेलन का आयोजन 100 से ज्यादा देशों की वित्तीय खुफिया इकाइयों (एफआईयू) द्वारा आयोजित किया जाता है। इसे सामूहिक रूप से एग्मॉन्ट समूह भी कहते हैं।

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