सऊदी अरब ने पाकिस्तानी डॉक्टरों को कहा वापस जाओ

Saudi Arabia doctors

रियाद : सऊदी अरब में काम कर रहे सैकड़ों पाकिस्तानी डॉक्टर अपनी नौकरी गंवा बैठे हैं। सऊदी अरब के पाकिस्तान की मेडिकल डिग्री की मान्यता रद्द करने के फैसले के बाद वहां रह रहे पाकिस्तानी डॉक्टर्स को अपने देश वापस लौटना पड़ रहा है। सऊदी सरकार ने पाकिस्तान से एम एस (मास्टर ऑफ सर्जरी) और एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) की डिग्री लेकर आए डॉक्टरों को अयोग्य ठहराया है। सऊदी सरकार का मानना है कि पाकिस्तान के इन दोनों डिग्री वाले डॉक्टर्स की पढ़ाई उस स्तर की नहीं हुई है कि उन्हें यहां प्रैक्टिस करने दिया जाए।

टर्मिनेशन लेटर सौंपा
सऊदी के स्वास्थ्य आयोग ने कई पाकिस्तानी डॉक्टर्स को टर्मिनेशन लेटर सौंप दिए हैं। स्वास्थ्य आयोग ने बताया कि व्यावसायिक योग्यता से पाकिस्तानियों के आवेदन रद्द कर दिए गए हैं क्योंकि नियमों के मुताबिक अब पाकिस्तानी डिग्री स्वीकार्य नहीं है। गौरतलब है कि जिन डॉक्टरों को टर्मिनेशन लेटर मिल गया है, उन्हें अब सऊदी छोड़ने और प्रत्यर्पण के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया है।‌ विभाग की ओर से दिए गए लेटर में लिखा गया है, “पेशेवर योग्यता के लिए आपका आवेदन अस्वीकार कर दिया गया है। वजह ये है कि पाकिस्तान से आपकी मास्टर डिग्री एससीएफएचएस नियमों के मुताबिक स्वीकार्य नहीं है।”

आवश्यक चिकित्सा प्रशिक्षण का अभाव
सऊदी मंत्रालय ने दावा किया कि डिग्री में वरिष्ठ नौकरियों के लिए आवश्यक चिकित्सा प्रशिक्षण का अभाव था। इस खबर से काफी पाकिस्तानी डॉक्टरों को झटका लगा है, जिनमें से कई सऊदी अरब में दशकों से काम कर रहे हैं। अब वो या अपने देश वापस जा रहे हैं या जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा और कोई भी विकल्प उनके पास नहीं बचा है।

दुर्दशा के लिए जिम्मेदार सीपीएसपी
सऊदी अरब के फैसले से प्रभावित हुए पाकिस्तानी डॉक्टरों का आरोप है कि पाकिस्तान का ‘कॉलेज ऑफ फिजीशियन ऐंड सर्जन्स’ (सीपीएसपी) ही उनकी दुर्दशा के लिए जिम्मेदार है। जेद्दाह के एक निजी अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया, सऊदी के एक अधिकारी ने उन्हें बताया था कि सीपीएसपी ने खुद ही सऊदी के स्वास्थ्य अधिकारियों को जानकारी दी थी कि पाकिस्तान की डॉक्टरी की डिग्री रिसर्च आधारित है, क्लीनिकल नहीं। कॉलेज के प्रतिनिधि दल ने जुलाई महीने में सऊदी अरब का दौरा किया था और दावा किया था कि वह पाकिस्तान की इकलौती यूनिवर्सिटी है जो डिग्री में क्लीनिकल प्रैक्टिस करवाती है जबकि देश की बाकी यूनिवर्सिटीज केवल एकेडमी पर केंद्रित हैं।

इमरान खान चुप्पी साधे हुए हैं
सऊदी के फैसले के बाद पाकिस्तान का स्वास्थ्य मंत्रालय इस मामले की जांच में जुट गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के विशेष सचिव जफर मिर्जा ने मंत्रालय को सऊदी सरकार के साथ संपर्क करने और मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। इस मामले पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी चुप्पी साधे हुए हैं। पाकिस्तान ने सऊदी अरब से भारी-भरकम कर्ज लिया है, इसलिए वह उसके फैसले के खिलाफ आवाज भी नहीं उठा सकता है। आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान सऊदी के कर्ज को खतरे में डालने का जोखिम नहीं लेना चाहता है।

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