भारत और अन्य देशों को आतंकवादियों से लड़ना ही होगा -ट्रंप

ट्रंप

वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अफगानिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ भारत, ईरान, रूस और तुर्की जैसे देशों को भी लड़ना होगा। उन्होंने कहा कि अभी केवल अमेरिका ही करीब सात हजार मील दूर आतंकवाद से लड़ रहा है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इन सभी देशों को कभी न कभी अफगानिस्‍तान में आतंकियों से लड़ना होगा, क्योंकि अफगानिस्तान में दशकों से चल रहे युद्ध से अब अमेरिका बाहर निकालना चाहता हैं।

सभी देशों को लड़नी होगी अपनी लड़ाई

उन्होंने कहा कि अन्य देश फिलहाल अफगानिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ बहुत कम प्रयास कर रहे हैं। अफगानिस्तान में आईएसआईएस के फिर से उभरने के सवाल पर ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि कभी न कभी रूस,अफगानिस्तान, ईरान, इराक, तुर्की को अपनी लड़ाई लड़नी होगी। वहां हमने पूरी तरह से खिलाफत को खत्म कर दिया है। मैंने यह काम रिकॉर्ड समय में किया है, लेकिन अन्य सभी देश जहां आईएसआईएस उभर रहा है, वह कभी न कभी इससे प्रभावित जरूर होगा।

अफगानिस्तान से नहीं होगी अमेरिकी सैनिकों की वापसी

ट्रंप ने अपने ओवल कार्यालय में मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि हमारे पास खुफिया जानकारी रहेंगी, और हमारा कोई न कोई वहां हमेशा मौजूद रहेगा। ट्रंप अफगानिस्तान में तालिबान के साथ चल रही शांति वार्ता पर संवाददाताओं के प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा कि वह कई विकल्पों पर गौर करना चाहेंगे। ट्रंप ने अफगानिस्तान से पूरी तरह से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से इनकार करते हुए कहा कि हमने संख्या कम की है। हम अपने कुछ सैनिकों को वापस ला रहे हैं, लेकिन हमें वहां अपनी उपस्थिति रखनी होगी।

किसी योजना को लेकर कर रहे हैं विचार

ट्रंप ने कहा कि हम एक योजना को लेकर अफगानिस्तान में तालिबान के साथ बातचीत कर रहे हैं, मुझे नहीं पता कि मेरी यह योजना स्वीकार होगी या नहीं, हो सकता है कि वह उन्हें स्वीकार न हो। हमारी अच्छी बातचीत चल रही है और हम देखेंगे कि क्या होता है। साथ ही उन्होंने बताया कि अन्य राष्ट्रपतियों ने जो बातचीत किया है, यह उससे कई गुना ज्यादा है।

आईएसआईएस अपनी पकड़ कर रहा है मजबूत

आतंकी संगठन आईएसआईएस अब अफगानिस्तान में अपनी पकड़ मजबूत करने में लगा हुआ है। अफगानिस्तान में कुछ दिन पहले ही एक आत्मघाती हमले में 63 लोगों की मौत हो गई है। बता दें कि अमेरिकी के सैनिक सितंबर 2001 से ही अफगानिस्तान में मौजूद है और अब करीब 18 साल बीत जाने के बाद अमेरिका दूसरे देशों से आतंक के खिलाफ अभियान में योगदान देने की अपील कर रहा है।

गौरतलब है कि ट्रंप ने इससे पहले भी संकेत दिए थे कि अफगानिस्तान से पूरी तरह से अमेरिकी सैनिकों की वापसी नहीं होगी। उनका कहना था कि अमेरिका को इस युद्ध ग्रस्त देश में मौजूद रहना ही होगा।

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