गोटबाया राजपक्षे होंगे श्रीलंका के राष्ट्रपति, सजित प्रेमदासा ने हार स्वीकार की

Gotabaya Rajpaksa

कोलंबो : श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में ‘श्रीलंका पोडुजाना पेरामुना पार्टी’ (एसएलपीपी) के उम्मीदवार और पूर्व रक्षा सचिव गोटबाया राजपक्षे ने जीत दर्ज की। गोटबाया श्रीलंका के आठवें राष्ट्रपति चुने गए। उन्होंने सत्तारूढ़ ‘न्यू डेमोक्रेटिक फ्रंट’ (एनडीएफ) के उम्मीदवार सजित प्रेमदासा को बड़े अंतर से हरा दिया है। राजपक्षे को चुनाव में श्रीलंका के बहुसंख्यक सिंहली समुदाय से भरपूर सहयोग और समर्थन मिला, जिसके चलते उन्हें 30 लाख से ज्यादा वोट मिले हैं और उनकी पार्टी का वोट शेयर लगभग 53 प्रतिशत रहा।

जल्द ही होगा शपथग्रहण

राजपक्षे के प्रवक्ता केहेलिया रम्बुकवेला ने इसे गोटबाया की जीत करार दिया। उन्होंने कहा, “हमें 53 से 54% के बीच वोट मिले हैं। यह हमारी साफ जीत है। सोमवार या उसके एक दिन बाद उनका शपथग्रहण हो सकता है।” राजपक्षे को देश के ज्यादातर सिंहली बहुल इलाकों का समर्थन मिला है, जबकि प्रेमदासा श्रीलंका के पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में रहने वाले अल्पसंख्यक तमिल समुदाय के बीच लोकप्रिय हैं।

प्रेमदासा ने हार स्वीकार कर राजपक्षे को दी बधाई

सत्तारूढ़ पार्टी ‘न्यू डेमोक्रेटिक फ्रंट’ के उम्मीदवार प्रेमदासा ने चुनाव में अपनी हार स्वीकारते हुए राजपक्षे को जीत की बधाई दी और कहा ‘जनता ने जो निर्णय दिया है मैं उसको स्वीकार करता हूं। गोटबाया राजपक्षे को राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए बहुत-बहुत बधाई, मैं आशा करता हूं जिस प्रकार राष्ट्रपति महिन्दा राजपक्षे ने अपने कार्यकाल में देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया आप भी वैसा ही काम करेंगे। मैं आशा करता हूं चुनाव के परिणाम आने के बाद भी देश में शांति बनी रहेगी। मैं अपनी पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं और जिन्होनें मुझे वोट दिया मैं उनका भी धन्यवाद करता हूं।’

अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी

राजपक्षे ने राष्ट्रपति चुनाव से कुछ महीने पहले ही अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ी थी। विपक्ष का आरोप है कि उसके पास अभी भी अमेरिकी पासपोर्ट है और उन्होंने झूठे दावे किए हैं कि वह अब अमेरिकी नागरिक नहीं हैं। अपने बड़े भाई महिन्दा राजपक्षे के राष्ट्रपति रहने के दौरान, गोटाबाया को शहरी विकास के प्रभारी के रूप में द्वीप राष्ट्र को विकसित करने का श्रेय दिया गया। बौद्ध-बहुल देश में गोटाबाया को सिंहली और पादरियों के द्वारा बहुत पसंद किया जाता रहा हैं।

राष्ट्रवाद का कार्ड खेला

अपने चुनाव अभियान के दौरान, उन्होंने बहुसंख्यक समुदाय के समर्थन पर जीत हासिल करने के लिए सिंहली और राष्ट्रवाद का कार्ड खेला। परिणाम साबित करते हैं कि बहुसंख्यक सिंहली ने उन्हें बड़ी संख्या में समर्थन दिया है और अल्पसंख्यकों -तमिलों और मुसलमानों ने उनके खिलाफ मतदान किया है।

गोटाबाया ने वादा किया है कि देश पर परिवार की सरकार नहीं चलेगी। हालांकि आलोचकों का कहना है कि उन्हें देश का प्रशासन संभालने के लिए अपने भाई महिंदा राजपक्षे को अगले प्रधानमंत्री और परिवार के अन्य सदस्यों के रूप में जल्द ही नियुक्त करना होगा।

बड़ी संख्या में हुआ मतदान

चुनाव आयोग के प्रमुख महिंदा देशप्रिय ने बताया कि 1.59 कराेड़ मतदाताओं के लिए देशभर में 12,845 मतदान केंद्र बनाए गए थे। मतदान के दाैरान हिंसा की घटनाओं के बावजूद 80% वाेटिंग हुई। इस बार चुनाव में राष्ट्रपति पद के लिए 32 उम्मीदवारों ने नामांकन भरा। इसलिए मतपत्र 26 इंच का था, जो अब तक के चुनावों में सबसे लंबा है। पश्चिम श्रीलंका में एक जगह कुछ अज्ञात लाेगाें ने मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं काे ले जा रही दाे बसाें पर पथराव के बाद गाेलीबारी की। हालांकि इसमें किसी काे चाेट नहीं लगी। पथराव से बसाें के शीशे टूट गए। चुनाव में छिटपुट हिंसा के 69 मामले दर्ज किए गए हैं।

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