अमेरिका में गजाला हाशमी समेत चार भारतीय समुदाय के लोगों ने चुनाव जीतकर रचा इतिहास

Ghazala Hashmi

वॉशिंगटन : अमेरिका में भारतीय समुदाय के लोगों ने चुनाव में कामयाबी हासिल की है। रिपोर्टस के अनुसार अमेरिका में राज्य और स्‍थानीय चुनाव में एक मुस्लिम महिला समेत चार भारतीय समुदाय के लोगों को बड़ी जीत हासिल हुई है। व्हाइट हाउस के पूर्व प्रौद्योगिकी नीति की पूर्व सलाहकार गजाला हाशमी ने वर्जीनिया राज्य सीनेट में निर्वाचित होने वाली पहली मुस्लिम महिला बनकर इतिहास कायम किया है। हाशमी पहले सामुदायिक कॉलेज की प्राध्यापक रह चुकी है। वहीं,दूसरी ओर सुहास सुब्रमण्यम का चयन वर्जीनिया राज्य प्रतिनिधि सभा के लिए किया गया है। सुब्रमण्यम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में व्हाइट हाउस प्रौद्योगिकी नीति सलाहकार के रूप में काम किया है।

यह सभी लोगों की जीत है-हाशमी

पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने गजाला को वर्जीनिया राज्य सीनेट में निर्वाचित होने वाली पहली मुस्लिम महिला बनने पर बधाई दी है। हालांकि यह पहली दवा नहीं है कि जब हाशमी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। इसके पहले भी अभ्सास में मौजूदा रिपब्लिकन सीनेटर ग्लेन स्टर्टेवंट को हराकर डेमोक्रेट हाशमी ने लोगों को ध्यान अपनी ओर खींचा था। मालूम हो कि 50 साल पहले ही हाशमी अपने परिवार के साथ भारत से अमेरिका में आकर रहने लगी थी। अपनी जीत पर उन्होंने कहा कि यह मेरे अकेेले की जीत नहीं है। यह उन सभी लोगों की जीत है जिन्हें वर्जीनिया में कुछ अलग देखना है या जो बदलाव की उम्मीद रखते हैं। यह मुझे मानने वाले हर व्यक्ति ‌की विजय है जो मुझ पर यकीन करते हैं कि मैं आवाज उठा सकती हूं।

अन्य भारतीयों को भी मिली कामयाबी

गजाला के अलावा अन्य भारतीयों को भी कामयाबी मिली हैं। भारतीय अमेरिकी बहुल लॉडन एंड प्रिंस विलियम जिले से वर्जीनिया राज्य की प्रतिनिधि सभा में सुहास सुब्रमण्यम ने अपनी जगह सुनिश्चित की है। उनकी मां बेंगलुरु की रहने वाली है और उन्होंने साल 1979 में ही भारत छोड़ दिया था। दूसरी ओर भारतीय अमेरिकी मानो राजू ने कैलिफोर्निया में सैन फ्रांसिस्को के पब्लिक डिफेंडर की पोस्ट पर दोबारा जीत दर्ज कराई है। चार्लोट सिटी काउंसिल के लिए उत्तरी कैरोलिना की डिंपल अजमेरा ने भी एक बार फिर से चुनाव जीता है। डिंपल पहले प्रमाणित सार्वजनिक लेखाकार रह चुकी है और 16 साल की उम्र में ही वह अपने माता-पिता के साथ अमेरिका आ गई थी। उन्हें उस वक्त अंग्रेजी बोलना नहीं आता था। उन्होंने दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (USC) से स्नातक की उपाधि हासिल करने के बाद एक प्रमाणित सार्वजनिक लेखाकार बनकर अपना बात मनवाया।

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