बड़ा खतरा : दिल पर भी ऐसा खतरनाक असर डाल रहा कोविड

बर्लिन : चाइनीज वायरस कोरोना न केवल लाखों लोगों की जान ले रहा है, बल्कि जो इसे हराकर ठीक हो रहे हैं, उनके दिल पर भी यह खतरनाक असर डाल रहा है। नये कोरोना वायरस संक्रमण से हाल में ठीक हुए करीब 100 मरीजों के एक विश्लेषण में खुलासा हुआ कि उनमें से करीब 80 प्रतिशत के हृदय पर इसका असर नजर आया है। जर्मन शोधकर्ताओं के अध्ययन में सामने आई चिंता की बात यह है कि जिन लोगों पर विश्लेषण किया गया, उनकी उम्र भी बहुत ज्यादा नहीं थी, वे 45 से 53 वर्ष के बीच के थे। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह नतीजे संकेत देते हैं कि कोविड-19 के दीर्घकालिक परिणामों को समझने के लिये और शोध किये जाने की जरूरत है।

‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल असोसिएशन’ में प्रकाशित अध्ययन में जर्मनी के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल फ्रेंकफर्ट (यूएचएफ) से अप्रैल और जून 2020 के बीच कोविड-19 बीमारी से ठीक होने वाले 100 लोगों का विश्लेषण किया गया।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, 78 मरीजों में हृदय संबंधी मामले शामिल थे और 60 लोगों के हृदय में सूजन थी। शोधकर्ताओं में अस्पताल के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह लक्षण पूर्व से नहीं थे और न ही शुरुआती जांच में कोई गंभीर रोग ही पाया गया था। इनमें से 67 प्रतिशत लोग घर पर ही ठीक हुए थे और 33 को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

अध्ययन में वैज्ञानिकों ने आरटी-पीसीआर जांच में नये कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 से संक्रमित होने के बाद हाल में ठीक हुए मरीजों का विश्लेषण किया था। शोधकर्ताओं ने मरीजों की जनसांख्यिकी विशेषताएं, हृदय के स्वास्थ्य के रक्त सूचक और हृदयवाहिनी चुंबकीय अनुनाद (सीएमआर) जांचों का अध्ययन किया। इस अध्ययन में शामिल 53 मरीज पुरुष थे और औसत उम्र 49 वर्ष थी। हृदय की जांच के बाद वैज्ञानिकों ने कहा कि हाल में कोविड-19 से ठीक हुए 100 में से 71 मरीजों के रक्त के नमूनों में उच्च-संवेदनशीलता वाले ट्रोपोनिन टी (एचएसटीएनटी) अणु मिले, जबकि पांच में यह महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि हाल में कोविड-19 से ठीक हुए 78 मरीजों की सीएमआर जांच के नतीजे असामान्य थे। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि हृदय के उत्तक के नमूनों के विश्लेषण में प्रतिरोधी तंत्र के कारण सूजन देखने को मिली। वैज्ञानिकों ने अध्ययन में लिखा, ‘हमारा अध्ययन बीमारी के शुरुआती चरण में ठीक होने वालों में हृदयवाहिनी के शामिल होने के बारे में महत्वपूर्ण नजरिया देता है।’

म्यूटेशन से मजबूत हो रहा वायरस
शोधकर्ताओं को लगता है कि जिस जेनेटिक म्यूटेशन ने कोरोना को ज्यादा संक्रमणकारी बनाया है, उसने शायद इसे टीके के प्रति ज्यादा संवदेनशील बना दिया है। इस म्यूटेशन को डी614जी नाम दिया गया है। म्यूटेशन वायरस की सतह पर “स्पाइक्स” की संख्या को बढ़ाता है और उन्हें और अधिक स्थिर बनाता है, जिससे वायरस को अधिक कुशलता से और कोशिकाओं को संक्रमित करने की अनुमति मिलती है। म्यूटेशन अब क्लिनिकल ट्रायल में टीकों के लिए समस्या पैदा नहीं करेगा, हालांकि, अतिरिक्त स्पाइक “एंटीबॉडी को बेअसर” करने के लिए लक्ष्य बनाए रखते हैं, टीकों को प्रेरित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
खुद से बनाए मास्क में कई परतें होनी चाहिए
खुद से बनाए फेस मास्क, वायरस से युक्त बूंदों को अवरुद्ध करने में तब कहीं अधिक प्रभावी हैं यदि उन्हें कपड़े की दो या तीन परतों के साथ बनाया जाता है। शोधकर्ताओं ने थोरैक्स पत्रिका में यह सलाह दी। हाई-स्पीड वीडियो और विशेष प्रकाश व्यवस्था का उपयोग करते हुए, उन्होंने देखा कि जब मास्क में कई परतें होती हैं, तो बोलने, खांसने और छींकने से कम बूंदें उत्पन्न होती हैं और वे दूर तक नहीं फैलती हैं। शोध के सह-लेखक ऑस्ट्रेलिया में यूएनएसडब्ल्यू सिडनी के रैना मैकइंटायर ने कहा है कि परतों की संख्या बढ़ने के साथ ही संरक्षण बढ़ता है और सांस लेने में परेशानी होती है, लेकिन “तीन परतें काफी आरामदायक हैं।” उनके प्रयोगों के लिए, उनकी टीम ने टी-शर्ट के कपड़े की एकल या दोहरी परत से बने मुखौटे की तुलना की, जिसमें धागे की संख्या 170/इंच थी। उन्होंने एक सर्जिकल मास्क का भी परीक्षण किया। वीडियो से फ्रीज फ़्रेमों ने दिखाया कि जब सर्जिकल मास्क सबसे प्रभावी था, तो दो-प्लाई वाले कपड़े के मास्क ने दूरी की बूंदों की यात्रा को सीमित करने में काफी अच्छा काम किया। यहां तक ​​कि एक-प्लाई मास्क मददगार था। उदाहरण के लिए, बाहरी परत को पॉलिएस्टर जैसे पानी प्रतिरोधी कपड़े से बना होना चाहिए।

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