रूस को दंडित करने के लिए जर्मनी से रिश्ते की कुर्बानी नहीं चढ़ाएंगे जो बाइडन

वाशिंगटन : जो बाइडन प्रशासन ने उस कंपनी और उसके सीईओ को प्रतिबंध से माफी देने का फैसला किया है, जो रूस से जर्मनी तक बन रही नॉर्ड-2 पाइपलाइन का काम देख रही है। वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने दो सूत्रों के हवाले से ये खबर दी है। वेबसाइट के मुताबिक जल्द ही इस फैसले का एलान होगा।जानकारों ने बाइडन प्रशासन के इस इरादे को इस बात का संकेत माना है कि अमेरिका पाइपलाइन के सवाल पर जर्मनी से अपने रिश्ते बिगाड़ने के पक्ष में नहीं है। लेकिन साथ ही इससे यह संकेत भी मिला है कि बाइडन प्रशासन के लिए अपनी घोषणा और अपने असली कदमों के बीच तालमेल बनाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है l गौरतलब है कि अमेरिका का विदेश मंत्रालय जल्द ही अपनी एक रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस (संसद) को सौंपने वाला है। उसमें उन कंपनियों की सूची शामिल की जाएगी, जो नॉर्ड-2 पाइपलाइन बनाने में जुटी हुई हैं। अमेरिकी कानून के मुताबिक ऐसी तमाम कंपनियां प्रतिबंध के दायरे में आती हैं। सूत्रों ने वेबसाइट एक्सियोस को बताया कि बाइडन प्रशासन इस मामले में संबंधित कंपनी को तो माफी दे देगा, लेकिन इस पाइपलाइन के सिलसिले में ही कुछ रूसी जहाजों पर प्रतिबंध लगाएगा। बाइडन प्रशासन संबंधित कंपनी और उसके सीईओ को अमेरिकी हित की दुहाई देते हुए माफी प्रदान करेगा।लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकेन के लिए असहज स्थिति पैदा होगी। कांग्रेस में उनके पद की पुष्टि के लिए हुई सुनवाई के दौरान ब्लिंकेन ने कहा था कि नॉर्ड-2 पाइपलाइन का काम पूरा होने से रोकने के लिए वे कृत संकल्प हैं। विश्लेषकों के मुताबिक प्रशासन का ये कदम खुद उसकी दुविधा को भी ज्यादा खोल कर सामने लाएगा। यह एक विचित्र कदम होगा कि पाइपलाइन निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी को तो माफी मिल जाएगी, लेकिन उसी परियोजना से जुड़े रूसी जहाजों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। नॉर्ड-2 पाइपलाइन का काम लगभग 95 फीसदी पूरा हो चुका है। इसके जरिए रूसी प्राकृतिक गैस जर्मनी तक आएगी। जानकार पहले से यह कहते रहे हैं कि इसका काम रोकना तभी संभव होगा, अगर जर्मनी पर प्रतिबंध लगे। जर्मनी को प्रतिबंध से बाहर रखने का मतलब यह होगा कि रूसी जहाजों पर पाबंदी महज एक प्रतीकात्मक कदम बन कर रह जाएगा l जानकारों के मुताबिक नॉर्ड-2 परियोजना अगर पूरी होती है, तो उसे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बड़ी भू-राजनीतिक जीत समझा जाएगा। उससे यूरोप में रूस का प्रभाव काफी बढ़ेगा। साथ ही ये आशंका बनी रहेगी कि यूरोप से तनाव बढ़ने पर रूस गैस की सप्लाई रोक देगा। वेबसाइट एक्सियोस के मुताबिक अगर अमेरिका या किसी दूसरे देश ने काम रोकने की कोशिश नहीं की, तो इसी साल नॉर्ड-2 परियोजना बन कर तैयार जाएगी।

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