फ्रांस के विरुद्ध बांग्लादेश हुआ खड़ा, मैक्रों को कहा – ‘इस्लाम का दुश्मन’

ढाका: फ्रांस के राष्ट्रपति के विवादित बयान के बाद मुस्लिम देशों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बॉयकॉट फ्रांस का नारा तेज हो गया है। इसके अंतरगत् तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन की अगुवाई में फ्रांस के प्रोडक्ट्स का मुस्लिम देशों ने बहिष्कार करने का निर्णय लिया। बांग्लादेश में इस मुद्दे में अपनी राय रखने में पीछे नहीं हटा। राजधानी ढाका में प्रदर्शनकारियों ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का पुतला जलाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।

फ्रांस में कुछ दिन पहले पैगंबर मोहम्मद पर छपे कार्टून को लेकर (ईशनिंदा) एक शिक्षक की नृशंस हत्या कर दी गई थी। उसने अपने स्कूली विद्यार्थियों को पैगंबर मोहम्मद के विवादित कार्टून दिखाया था। इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांसीसी धर्मनिरपेक्षता का बचाव करते हुए पत्रिका शार्ली हेब्दो में पैगंबर मोहम्मद पर छपे कार्टून का समर्थन किया था और उस शिक्षक को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वो कार्टून के मामले में नहीं झुकेंगे। बता दें कि कुछ दिन पहलेका सिर कलम कर दिया गया था।

ढाका में यह कैसा तमाशा
पुलिस के अनुमान के मुताबिक़ फ्रांस के विरोध में आयोजित रैली में करीब 40 हजार लोग शामिल थे। इनमें बांग्लादेश की बड़ी इस्लामिक पार्टियों के नेता भी शामिल थे। प्रदर्शनका​रियों ने फ्रांसीसी सामानों के बहिष्कार का नारा लगाते हुए फ्रांस राष्ट्रपति मैक्रों को सजा देने की मांग भी रखी। प्रदर्शनकारी ढाका स्थित फ़्रांसीसी दूतावास की तरफ़ बढ़ रहे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। एक नेता निसारुद्दीन ने कहा कि फ्रांस मुसलमानों का दुश्मन है और जो फ्रांस का प्रतिनिधित्व करते हैं वो भी दुश्मन हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए फ्रांस के दूतावास से पांच किलोमीटर दूर कड़ी व्यवस्था की थी।

क्या है पूरा मामला
16 अक्टूबर को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाते हुए छात्रों को पैगंबर मोहम्मद का विवादित कार्टून दिखाने वाले टीचर सैमुअल पैटी का गला काट कर हत्या कर दी गयी। इसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने टीचर सैमुएल पैटी की हत्या को ‘इस्लामी आतंकवाद’ करार देते हुए कहा कि ‘इस्लाम हमारा भविष्य हथियाने का इरादा रखता है, जो कभी नहीं होगा।’ तब से ​ लेकर अब तक यह घटना राजनीतिक रूप ले चुकी है जहां मुस्लिम देशों में फ्रांस के विरोध में प्रदर्शन कर उनके प्रोडक्ट्स के बहिष्कार का अभियान छेड़ दिया है।

बताते चलें कि मुस्लिम देशों ने फ्रांस पर नस्लवाद, इस्लामोफोबिया और फासिस्ट रवैये के आरोप लगाए गए हैं। पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों के मुद्दे पर पूरा मुस्लिम वर्ल्ड फ्रांस के खिलाफ लामबंद हो कर खड़ा हो गया है।

विभिन्न देशों की प्रतिक्रिया
पूरे मामले पर सऊदी अरब ने भी बयान जारी कर पैगंबर मोहम्मद के कार्टून की निंदा करते हुए उन हर कोशिश को खारिज किया जो इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ती है। सऊदी ने आतंकवाद की भी निंदा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी ट्वीट कर फ्रांस के राष्ट्रपति पर इस्लाम पर हमला करने का आरोप लगाया। वहीं कुवैत, जॉर्डन और कतर में कई दुकानों से फ्रांस के सामान हटाए जा रहे हैं। इराक, लीबिया और सीरिया समेत कई देशों में फ्रांस के विरोध में प्रदर्शन तेजी पकड़ रहे हैं।

हालांकि, यूरोपीय देशों के नेताओं ने फ्रांस को अपना समर्थन दिया है। जहां, जर्मनी ने मैक्रों के साथ एकजुटता जाहिर की है और सरकार के प्रवक्ता स्टीफन सीबर्ट ने तुर्की के राष्ट्रपति की टिप्पणी को अपमानजनक और अस्वीकार्य करार दिया है। वहीं, डच प्रधानमंत्री मार्क रूट ने कहा कि नीदरलैंड्स फ्रांस के साथ मजबूती से खड़ा है। इटली के प्रधानमंत्री ने भी फ्रांस का भरपूर समर्थन किया है।

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