अमेरिका और कनाडा से बीते 50 सालों में 3 अरब परिंदे गायब

birds disappeared

नई दिल्ली : उत्तरी अमेरिका में बीते 50 सालों में करीब 3 अरब परिंदे गायब हो गए हैं, जिसकी वजह से आकाश में अकेलापन और सन्नाटा बढ़ गया है। अमेरिका और कनाडा में 50 साल पहले चिड़ियों की तादाद करीब 10.1 अरब थी, जो अब घट कर 7.2 अरब रह गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के संरक्षण वैज्ञानिक केनेथ रोजेनबर्ग का कहना है कि जरूरत इस बात की है कि लोग अपने आसपास के चिड़ियों पर ध्यान दें, वे धीरे धीरे गायब हो रही हैं। सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह है कि यह हमारी आंखों के सामने हो रहा है। मुमकिन है कि हमें पता भी ना चले और बहुत देर हो जाए।

मौसम रडार का इस्तेमाल कर आंकड़े जुटाए गए

रोजेनबर्ग और उनके सहयोगियों ने मौसम के रडार का इस्तेमाल कर चिड़ियों की आबादी के आंकड़े जुटाए हैं। इसके अलावा 1970 से अब तक चिड़ियों पर हुए 13 सर्वेक्षणों और उत्तरी अमेरिका की 529 पक्षी प्रजाति के ट्रेंड के बारे में कंप्युटर मॉडल की भी मदद ली गई है। इनमें सभी प्रजातियां नहीं हैं लेकिन करीब तीन चौथाई प्रजातियां शामिल हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि जो छूट गई हैं उनमें ज्यादातर दुर्लभ प्रजाति की चिड़िया हैं।

घरेलू पक्षी गौरैया पर इसका सबसे ज्यादा असर हुआ है

रोजेनबर्ग ने बताया कि मौसम रडार का इस्तेमाल नया है यह प्रवासी पक्षियों के झुंड की जानकारी देता है।गौरैया का हाल सबसे ज्यादा बुराशोधकर्ता रुबेगा का कहना है कि अगर आप किसी दिन सुबह घर से बाहर निकलें और देखें कि आपके आसपास के सारे घर खाली हो गए हैं, तो आपका अंदाजा सही होगा कि कुछ खतरनाक हो रहा है। इसी प्रकार हमारे आस पास रहने वाले 3 अरब पक्षी हमारी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले और एंसेफिलाइटिस जैसी बीमारी फैलाने वाले कीड़ों को खाते थे, वो अब चले गए हैं। मेरे ख्याल से हम सब को यह सोचना चाहिए कि यह खतरनाक है। आमतौर पर ज्यादा दिखने वाली और आसानी से पहचानी जाने वाली गौरैया का हाल सबसे ज्यादा बुरा है हालांकि अभी वो लुप्त होने की स्थिति में नहीं आई हैं।

आवास का खत्म होना सबसे बड़ी वजह है

विशेषज्ञों का कहना है कि आवास का खत्म होना चिड़ियों के कम होने के पीछे सबसे बड़ी वजह है। 2015 की एक रिसर्च बताती है कि अमेरिका और कनाडा में बिल्लियां हर साल 2.6 अरब चिड़ियों को मार देती हैं। इसके अलावा खिड़कियों से टकरा कर 62.4 करोड़ और कारों से टकरा कर 2.14 करोड़ परिंदे हर साल मारे जाते हैं। सवाल है कि ऐसी स्थिति में लोग इन चिड़ियों को कैसे बचा सकते हैं। इसके लिए बिल्लियों को घर के अंदर रखना होगा। खिड़कियों का इस्तेमाल इस तरह से करना होगा कि उनमें फंसकर या उनसे टकरा कर चिड़ियों के मरने की आशंका ना रहे। इसके साथ ही कीटनाशकों का खेती में इस्तेमाल बंद करना होगा। इसके अलावा ऐसी कॉफी खरीदी जाए जो जंगल जैसे फार्मों में उगाई जाती है। अगर ऐसा हो सके तो आकाश अकेला नहीं होगा, चिड़ियों की गूंज उसका दिल बहलाती रहेगी।

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