संयुक्त राष्ट्र की बातचीत की अपील को मानने से ईरान का इंकार

संयुक्त राष्ट्र : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने सोमवार को दोनों देशों से मौजूदा तनाव को बातचीत के जरिए खत्म की अपील की है। हालांकि ईरान ने यूएनएससी की अपील को ठुकरा दिया है। उसने इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए नये प्रतिबंधों को बताया है। मालूम हो कि ईरान ने पिछले हफ्ते एक अमेरिकी निगरानी ड्रोन को मार गिराया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए थे।
अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा
यूएनएससी ने कुवैत द्वारा तय की गई सर्वसम्मत प्रेस विज्ञप्ति में तेल टैंकरों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए इसे विश्व की ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। यूएनएससी की दो घंटे तक चली बैठक में तय हुआ की ईरान को अलग-थलग नहीं किया जाएगा। साथ ही स्पष्ट रूप से कहा कि सभी पक्षों को एक बेहद आशंकित सैन्य टकराव से पीछे हटना चाहिए। यूएनएससी ने सभी देशों से यह भी कहा कि, ‘‘अत्याधिक संयम बरतें और तनाव को कम करने के लिए कदम उठाएं।’’
विश्व शक्तियों ने भी बातचीत का आह्वान किया
अमरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अल खमैनी और आठ ईरानी कमांडरों को निशाना बनाते हुए प्रतिबंध लगाये थे। इसके बाद विश्व शक्तियों ने अपना पूरे घटनाक्रम को लेकर बयान जारी किया है। ईरान के मित्र रूस ने अपने बयान में अमेरिका का समर्थन करते हुए कहा कि ‘‘ परिषद के सदस्यों ने आग्रह किया कि मतभेदों को शांति और बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।’’ अन्य विश्व शक्तियों ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने भी अपने बयान में दोनों देशों से अंतरराष्ट्रीय नियमों के सम्मान करने, तनाव में कमी लाने और बातचीत करने का आह्वान किया है।
ईरानी राजदूत ने कहा बातचीत शुरू नहीं कर सकते
इसी बीच जब वॉशिंगटन के अनुरोध पर यूएनएससी के बंद कमरे बैठक करने के बाद पत्रकारों के समक्ष ईरान के राजदूत माजिद तख्त रवांची ने कहा कि,”स्थिति अमेरिका के साथ बातचीत के अनुकूल नहीं है,और आप उसके साथ बातचीत शुरू नहीं कर सकते जो आपको धमका रहा हो, डरा रहा हो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसी बातचीत के लिए माहौल ठीक नहीं है।’’

बता दें कि वर्ष 2015 में ट्रंप ने अमेरिका को परमाणु समझौते से अलग करने का फैसला लिया था, जिसके बाद से ईरान और अमेरिका में तनाव एक बार फिर बढ़ने लगा है। अमेरिका ने दोहराया है कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने नहीं देगा।

गौरतलब है कि अमेरिका के सहयोगी देश इजरायल ने भी अमेरिका को समर्थन देने का संकेत दिया है। सऊदी ने भी ईरान का विरोध किया है। वहीं, रूस ईरान के समर्थन में आगे आया है।

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