लद्दाख में भारत ने भी बढ़ाये सैनिक, चीन ने सेना काे तैयार रहने को कहा

प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री ने एनएसए, सीडीएस व सेना अध्यक्षों संग बैठक की, सड़कों का निर्माण जारी रहेगा, चीन ने 10 किलोमीटर भीतर तंबू गाड़े
लद्दाख : भारत ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के आसपास चीन और भारतीय सेना के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर फैसला किया है कि संघर्ष विराम के लिए बातचीत तो चलती रहेगी लेकिन भारतीय सेना वहां अपनी संप्रभुता से बिल्कुल भी समझौता नहीं करते हुए अपनी पकड़ कायम रखेगी। भारत ने यह भी फैसला लिया है कि इलाके में सड़क निर्माण का काम चलते रहना चाहिए और भारत अपना सैन्य दल बल चीन के मुकाबले बढ़ाता रहेगा। इसबीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने भी अपनी सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा है।पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास चीन की हरकतों के बीच भारत में भी हालात से निपटने की तैयारियां शुरू हो गयीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को उच्चस्तरीय बैठक बुलायी जिसमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुख शामिल हुए। इसके बाद मोदी ने विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला से भी चर्चा की। दोनों पक्षों के बीच करीब 20 दिन तक चले गतिरोध के मद्देनजर भारतीय सेना ने उत्तर सिक्किम, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में अपनी मौजूदगी उल्लेखनीय ढंग से बढ़ाई है और यह संदेश दिया है कि भारत चीन के किसी भी आक्रामक सैन्य रुख के आगे रुकने वाला नहीं है।

दोनों देशों के सैन्य अफसरों की बैठकें बेनतीजा

तनाव कम करने के लिए भारतीय सेना और चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के अफसरों की कई बैठक हो चुकी हैं। दोनों पक्ष अब तक पांच दौर की बातचीत कर चुके हैं लेकिन सोमवार तक बातचीत बेनतीजा रही। पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन के बीच करीब दो महीने से तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस बीच चीन ने भारतीय इलाके में 10 किलोमीटर भीतर घुसकर 100 से ज्यादा तंबू गाड़ दिये हैं। इस महीने दोनों देशों के सैनिकों के बीच 3 बार झड़प भी हो चुकी है।

भारत ने पेंगोंग त्सो झील और गालवान वैली में सैनिक बढ़ाये

अगर भारत और चीन की सेनाएं लद्दाख में आमने-सामने हुईं तो 2017 के डोकलाम विवाद के बाद ये सबसे बड़ा विवाद होगा। सूत्रों ने बताया कि भारत ने पेंगोंग त्सो झील और गालवान वैली में सैनिक बढ़ा दिये हैं। इन दोनों इलाकों में चीन ने दो हजार से ढाई हजार सैनिक तैनात किये हैं, साथ ही अस्थायी सुविधाएं भी बढ़ा रहा है। चीन लद्दाख के कई इलाकों पर अपना दावा करता रहा है। इनके अलावा चीन के साथ लगी पश्चिमी सीमा के ट्रेग हाइट्स, डेमचोक और चुमार इलाकों में भी भारतीय सेना बेहद सख्ती दिखा रही है। गौरतलब है कि 5 मई को लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कहासुनी हुई और 6 मई की सुबह दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गयी जिसमें दोनों तरफ के कई सैनिक जख्मी हो गये। सूत्रों ने बताया कि उसके बाद से झड़प की जगह के नजदीक ही चीन ने अपने सैनिकों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि शूरू कर दी। इतना ही नहीं चीन ने पेंगोंग लेक में पेट्रोलिंग भी बढ़ा दी और बोट भी बढ़ा दिये।
चिनफिंग का पीएलए को युद्ध की तैयारी का निर्देश
इस बीच भारत से लद्दाख सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपनी सेना को युद्ध की तैयारी करने के निर्देश दिये हैं। चिनफिंग ने मंगलवार को सेंट्रल मिलिट्री कमीशन की बैठक में कहा कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों के प्रशिक्षण को व्यापक रूप से बढ़ाया जाये और सेना को युद्ध के लिए तैयार किया जाये।

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