राष्ट्रपति कोविंद ने आइसलैंड के साथ राजनीतिक व आर्थिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया

रेक्जाविक (आइसलैंड) : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को आइसलैंड के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की और भारत की मुख्य चिंताओं को समझने के लिए आइसलैंड सरकार को धन्यवाद किया। आइसलैंड के राष्ट्रपति गुडनी जोहान्सन के बातचीत के बाद जारी बयान के मुताबिक राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपनी वैश्विक साझेदारी का जायजा लिया और इसे और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। बयान के मुताबिक वार्ता के बाद भारत और आइसलैंड ने मत्स्य क्षेत्र में सहयोग, सांस्कृतिक सहयोग और राजनयिक और अधिकारिक पासपोर्ट धारकों को वीजा से छूट को लेकर समझौते एवं सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि भारत सतत मत्स्यिकी, समुद्री अर्थव्यवस्था, जहाजरानी, हरित विकास, ऊर्जा, निर्माण और कृषि क्षेत्र में आइसलैंड की क्षमता का लाभ उठाने का इच्छुक है। कोविंद ने आर्कटिक परिषद की अध्यक्षता आइसलैंड को मिलने पर जोहान्सन को बधाई दी और इसके उद्देश्यों और नतीजों में भारत के सकारात्मक योगदान की इच्छा जताई। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत कई दशकों से सीमापार आतंकवाद का पीड़ित है। मैं राष्ट्रपति जोहान्सन को आइसलैंड द्वारा भारत में हुए पुलवामा हमले की निंदा करने एवं समर्थन और एकजुटता प्रकट करने के लिए धन्यवाद देता हूं।’’ राष्ट्रपति कोविंद ने संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद की भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करने के लिए आइसलैंड को आभार जताया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘‘मुझे बताया गया कि आइसलैंड में हर साल 40 वर्ग किलोमीटर ग्लेशियर खत्म हो रहे हैं। मेरे अपने देश में हम हिमालय की चोटियों पर तेजी से पिघल रही बर्फ की समस्या का सामना कर रहे हैं।’’ राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि पर्यावरण को बचाने की कोशिशों के मामले में आइसलैंड बेहतरीन उदाहरण है।

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