पाकिस्तान में बसेंगे चीनी नागरिक, चलेंगी चीनी करेंसी

नई दिल्ली : पाकिस्तान में अब यहां सड़कें पुल, इमारतें, बंदरगाह, बिजली सब मेड इन चाइना होगी, यही नहीं पाकिस्तान में चीन की करेंसी तक चलने वाली है। यानी पाकिस्तान में अब सामान भी चीनी करेंसी में खरीदे-बेचे जाएंगे। क्यों कि पाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री इमरान खान ने आपसी सहयोग आर्थिक कोरिडोर (सीपेक) के तहत अपना पूरा का पूरा देश ही चाइना का सौंप दिया है। वहीं जब से पाकिस्तान में इमरान खान ने सत्ता संभाली है, तब से पाकिस्तान और चीन की दोस्ती पर सवाल उठने लगे हैं।

पाकिस्तान में 5 लाख चीनी नागरिक भी बसेंगे

पाकिस्तान का खजाना खाली है। रुपया गिर चुका है। इन नोटों को कोई पूछ नहीं रहा। लिहाजा अब पाकिस्तान में चलेंगी नई चीनी करेंसी। सीपेक के नाम पर पाकिस्तान ने ना सिर्फ अपने देश बल्कि जमीर और खुद्दारी सब कुछ चीन के हवाले कर दी है। आलम ये है कि चीन अब अपनी करेंसी तक पाकिस्तान में चलाने जा रहा है। दरअसल चीन, पाकिस्तान में सीपेक के जरिए घुसपैठ करने के बाद उसे अपना गुलाम बनाने के लिए एक और पासा फेंका है। चीन ने पाकिस्तान में ना सिर्फ 5 लाख चीनी नागरिकों को बसाने का प्लान बनाया है, बल्कि चीन यहां अपनी करेंसी भी चलाने जा रहा है। यानी पाकिस्तानी रुपये और डॉलर के बाद अब चीनी युआन भी पाकिस्तान में लीगल टेंडर बन जाएगा।
चीन के शिनजियांग से ग्वादर तक जाने वाले चाइना पाकिस्तान ईकोनॉमिक कॉरीडोर यानी सीपेक के नाम पर अब चीन पाकिस्तान में घुस गया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से लेकर ग्वादर पोर्ट तक चीनी दबदबे का आलम ये है कि इन इलाकों में चीनी भाषा का प्रयोग भी शुरू हो गया है। पीओके के अलावा चीनी सरकार व्यापार के लिहाज से पाकिस्तान के सबसे खास ग्वादर पोर्ट पर भी अपना दबदबा बढ़ा रहा है। यहां तो उसने अपने 5 लाख चीनी नागरिकों को बसाने के लिए एक अलग शहर ही बसाने का फैसला किया है। जहां सिर्फ चीनी नागरिक रहेंगे। चीनी जुबान बोली जाएगी। और चीनी करेंसी भी चलेगी। मतलब एक लिहाज से पाकिस्तान ने चीनी करेंसी को लीगल टेंडर मानने की हामी भर दी है।
पूर्व सरकार नवाज ने भी किया था पहल

हालांकि ये पहल नवाज सरकार के कार्यकाल में ही शुरू कर दी गई थी। जब पाकिस्तान के तत्कालीन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट मिनिस्टर अहसन इकबाल और चीनी एंबेसडर याओ जिंग ने फैसला किया था कि निकट भविष्य में पाकिस्तान में चीनी युआन को भी वही दर्जा हासिल होगा, जो अमेरिका डॉलर को है। यानी चीन और पाकिस्तान के बीच होने वाले व्यापार अब यूएस डॉलर की जगह चीनी करेंसी युआन में भी हो सकता है। जब से अमेरिका ने पाकिस्तान को आर्थिक मदद देना बंद किया है तब से ही पाकिस्तान छटपटा रहा है। उसकी अर्थव्यवस्था हिचकोले खा रही है। लिहाजा उसे चीन में ही अपना मददगार नजर आ रहा है। मगर मदद के चक्कर में पाकिस्तान चीन की चाल को समझ नहीं पा रहा है। ऐसा करके वो चीन की करेंसी को तो अमेरिकी करेंसी के बराबर का दर्जा देकर उसे खुश कर रहा है। मगर अमेरिका को नाराज भी कर रहा है। यानी पाकिस्तान धीरे धीरे चीन को छोड़कर अपने सारे दरवाजे बंद कर रहा है।




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