नेपाल के दो गांवों पर चीन का कब्जा

काठमांडू : भारत के साथ कालापानी सीमा विवाद का मुद्दा उठाने वाले नेपाल के रुई और तेइगा गांव पर पिछले तीन साल से चीन ने कब्जा कर रखा है। एक के बाद एक भारत विरोधी कदम उठा रही नेपाल की केपी शर्मा ओली सरकार ने ड्रैगन की इस नापाक हरकत पर चुप्पी साध रखी है। भारत के खिलाफ बयानबाजी करने वाली नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी ने भी इस पर मौनव्रत धारण कर लिया है। करीब 60 साल तक नेपाल सरकार के अधीन रहने वाले रुई और तेइगा गांव के गोरखा अब चीन के दमनकारी शासन के अधीन हो गए हैं।
2017 से तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र का हिस्सा ये गांव
नेपाली अखबार अन्नपूर्णा पोस्ट के मुताबिक रुई और तेइगा गांव वर्ष 2017 से तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र का हिस्सा हो गया है। इस गांव में अभी 72 घर हैं। रुई गांव अभी भी नेपाल के मानचित्र में शामिल है, लेकिन वहां पर पूरी तरह से चीन का नियंत्रण हो गया है। रुई गांव के सीमा स्तंभों को अतिक्रमण को वैध बनाने के लिए हटा दिया गया है। नेपाल के भू-राजस्व कार्यालय गोरखा के अनुसार, उनके पास अभी भी रुई गांव के निवासियों से एकत्र राजस्व का रेकॉर्ड है।
लापरवाही से खो दिए दोनों गांव
नेपाली इतिहासकार रमेश धुंगल का कहना है कि वर्ष 2017 तक रुई और तेइगा गांव देश के गोरखा जिले के उत्तरी भाग में थे। रुई गांव नेपाल का हिस्सा है। न तो हमने इसे युद्ध में खोया और न ही यह तिब्बत से संबंधित किसी विशेष समझौते या अनुबंध के अधीन था। नेपाल ने बॉर्डर के पिलर को लगाते समय लापरवाही की, जिसके कारण हमने रुई और तेइगा दोनों गांव खो दिए।

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