चीन की आक्रमक नीतियों को लेकर अमेरिका ने फिर दी चेतावनी

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न्यूयॉर्कः अमरिका ने चीन की आक्रामक और विस्तारवादी नीतियों को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर से चेतावनी दी है। इस चेतावनी में डोकलाम विवाद का भी जिक्र किया गया है। अमेरिका का यह बयान ऐसे समय पर चर्चा में आया है जब अगले हफ्ते चीन के रक्षा मंत्री भारत दौरे पर होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी संसद में पेश किए अपने हालिया रिपोर्ट में पेंटागन ने कहा है कि चीन अपने पड़ोसियों के साथ सशस्त्र संघर्षों को बढ़ा कर अपनी क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में नहीं डालना चाहता, क्योंकि चीन के आर्थिक विकास का आधार ही पड़ोसी देशों से व्यापार है। पूर्वी चीनी समुद्रों में अपने विस्तारित क्षेत्रीय और समुद्री संप्रभुता के दावों को लेकर चीन का सशस्त्र संघर्ष स्पष्ट नजर आ रहा है।

अपनी सेना के नवीनीकरण में जुटा चीन
रिपोर्ट में चीन की नवीनीकरण को लेकर उठाए गए कदमों को भी दिखाया गया है, जिसमें लंबी दूरी की मिसाइल, परमाणु बमवर्षक और पनडुब्बियों से लेकर सूचना, साइबर, अंतरिक्ष, काउंटर-स्पेस और युद्ध अभियान क्षमताएं शामिल हैं। पेंटागन की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की हरकतों और हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नेवी की तैनाती के बावजूद भारत चीन के विदेशमंत्री का स्वागत करने वाला है, जो 21 से 24 अगस्त तक भारत के दौरे पर रहेंगे।
गौरतलब है कि अमेरिका भारत को अपने पक्ष में रखना चाहता है। हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की उग्र नीतियों के विरोध में जापान, आस्ट्रेलिया और भारत के साथ मिलकर एक चतुर्भुज बनाना चाहता है। यहां तक कि अमेरिका ने भारत को अपने पक्ष में रखने के लिए अपने धुर-विरोधी रूस से भी हथियार खरीदने की छूट दे दी है। हालांकि भारत ने इस मामले में अभी तक अपना कोई पक्ष नहीं रखा है।



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