कोविड-19: बायोटेक व फाइजर वैक्सीन को डब्ल्यूएचओ ने दी मान्यता

भारत में टीके के इस्तेमाल पर निर्णय जल्द
मास्को: फाइजर और बायोटेक कंपनियों द्वारा निर्मित वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वैक्सीन को विश्व स्वास्थ संगठन (डब्लूएचओ) ने आपातकालीन उपयोग के लिए मान्यता दे दी। डब्लूएचओ ने कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद पहली बार किसी वैक्सीन को यह मंजूरी दी है। डब्ल्यूएचओ ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि विश्व स्वास्थ संगठन ने आज आपातकालीन तौर पर इस्तेमाल करने के लिए फाइजर और बायोटेक की वैक्सीन को मान्यता दे दी है। मालूम हो कि विश्व के कई देशों ने कोरोना की वैक्सीन निर्मित की है लेकिन डब्ल्यूएचओ ने फिलहाल केवल इन दो वैक्सीन को ही मान्यता दी है।
इसी के साथ अब दुनियाभर के देशों में फाइजर की कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल का रास्ता खुल गया है। भारत में कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी देने वाली एक्सपर्ट कमेटी की बैठक शुरू हो गयी है। इस बैठक में वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी देने पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
डब्ल्यूएचओ ने अपने बयान में कहा कि फाइजर-बायोटेक वैक्सीन पहली ऐसी वैक्सीन है, जिसे कोरोना महामारी के आने के बाद संगठन की ओर से इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। कोरोना वायरस वैक्सीन की वैश्विक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में ये एक बेहद ही सकारात्मक कदम है। फाइजर की वैक्सीन को डब्लूएचओ की हरी झंडी मिलने का मतलब है कि अब गरीब देशों को जल्द ही यूरोप और उत्तरी अमेरिका में पहले से उपलब्ध कोरोना के खुराक मिल सकती है। हर देश के पास अपनी एक ड्रग रेग्युलेटरी एजेंसी है, जो किसी भी कोरोना वैक्सीन के लिए अपनी मंजूरी देने के बाद ही उसका इस्तेमाल करेगी। कमजोर संसाधन वाले देश आमतौर पर वैक्सीन के टेस्ट के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन पर निर्भर करते हैं।

शेयर करें

मुख्य समाचार

ममता का मास्टर स्ट्रोक है नंदीग्राम आंदोलन, शुभेन्दु के तेवर भी गरम

महज एक गांव नहीं, बंगाल की सत्ता में परिवर्तन का प्रतीक है नंदीग्राम दादा और दीदी की लड़ाई में किसके हाथ लगेगा विजय रथ, तय करेगी आगे पढ़ें »

सर्दियों में नाखूनों के आसपास की निकलती है खाल ? राहत देंगे ये घरेलू उपाय

कोलकाता : सर्दियों के मौसम में अक्सर कई लोग नाखूनों के आस-पास की खाल निकलने की शिकायत करते हैं। इसकी वजह से न सिर्फ व्यक्ति आगे पढ़ें »

ऊपर