उत्तरी कोरिया की अमेरिका को धमकी, कहा-धैर्य टूटने के कगार पर

प्योंग्यांग :  प्रतिबंधों का सामना कर रहे उत्तरी कोरिया ने अमेरिका को धमकी दी है कि उसका धैर्य टूटने के कगार पर है। साथ कहा है कि वॉशिंगटन बातचीत के लिए जल्द सही कूटनीतिक प्रक्रिया अपनाए। किम सरकार ने बुधवार को यह बात कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से कही।

अमेरिका को आकलन का तरीका बदलना चाहिए
कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ”अमेरिका को अपने आकलन का तरीका बदलना चाहिए, ताकि हम पिछले साल जून में हुई पहली मुलाकात के समझौते को बनाए रख सकें।” उन्होंने कहा कि ”अमेरिका को पिछले एक साल में हमारे रिश्तों में आए बदलाव को देखना चाहिए और जल्द से जल्द अपनी नीतियों पर फैसला लेना चाहिए, वरना काफी देर हो जाएगी क्योंकि धैर्य की भी एक सीमा होती है।”
रिश्ते पुरानी तनाव की स्थिति में आ सकते हैं
उत्तरी कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका उत्तर कोरिया पर विश्वास नहीं करता है तो दोनों के रिश्ते पुरानी तनाव की स्थिति में आ सकते हैं। दरअसल,हाल ही में किम ने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो पर परमाणु मुद्दे पर होने वाली बातचीत की पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतारने का आरोप लगाया था। साथ ही उसने पॉम्पियो को बातचीत से हटाने की भी मांग की थी।
ट्रंप से मुलाकात के बाद राजी हुआ था तानाशाह

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और तानाशाह किम जोंग-उन के बीच दो बार मुलाकात हो चुकी है। सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप स्थित कापेला होटल में दोनों नेताओं की पहली मुलाकात हुई थी। यह बातचीत करीब डेढ़ घंटे चली। बातचीत के दौरान ट्रंप किम को पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए राजी करने में सफल रहे थे। दोनों नेताओं ने इसके लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए थे। किम ने अपना वादा निभाते हुए इसके बाद कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया। वहीं दूसरी मुलाकात परमाणु मसले पर कोई समझौता होने से पहले ही खत्म हो गई थी। किम ने हनोई में हुई मुलाकात के दौरान प्रतिबंधों में तुरंत छूट की मांग भी की थी। हालांकि छूट के बदले में उत्तर कोरिया क्या करेगा, इस पर दोनों पक्ष किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाये थे।

बता दें कि लगातार अमेरिकी प्रतिबंध का सामना कर रहे उत्तरी कोरिया ने दूसरी बातचीत बेनतीजा रहने के बाद पिछले महीने लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण किया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार परीक्षण तानाशाह किम जोंग-उन की मौजूदगी में हुए थे। अमेरिका इस परीक्षण को प्रतिबंधों उल्लंघन का मानते हुए उत्तर कोरियाई कार्गो शिप को हुए पकड़ लिया था। अमेरिका का आरोप था कि जहाज उत्तर कोरिया से अवैध रूप से कोयला दूसरे देशों में पहुंचाता था और बदले में वहां से अपने देश के लिए भारी मशीनरी लाता है। इस अमेरिकी कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच फिर से तनाव गहराने की आशंका बढ़ गई है।

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