अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी कहा, ‘मोदी है तो मुमकिन है’

वॉशिंगटन : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ इच्छा शक्ति और कुशल नेतृत्व को देश ही नहीं विदेशों में भी सराहा जा रहा है। इस बात का जीता जागता प्रमाण अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने दिया। उन्होंने अपनी भारत यात्रा से पहले लोकसभा चुनाव के दौरान लोकप्रिय हुए नारे ‘मोदी है तो मुमकिन है’ का जिक्र किया। उन्होंने ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को अगले चरण पर ले जाने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मोदी प्रशासन के पास ऐसा करने का अद्वितीय अवसर है।

पोम्पिओ ने ‘इंडिया आइडियाज समिट ऑफ अमेरिका-इंडिया बिजनेस काउंसिल’ में भारत की नीति संबंधी अपने अहम भाषण के दौरान बुधवार को कहा कि ”जैसा कि प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी ने अपनी हालिया प्रचार मुहिम में कहा था कि ”मोदी है तो मुमकिन है”, तो उसी को ध्यान में रखकर मैं यह पता लगाना चाहता हूं कि हमारे लोगों के बीच क्या संभव है।”

साझे दृष्टिकोण को मजबूत किया

अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपने भारत मिशन को लेकर कहा कि उनका मानना है कि दोनों देशों के पास अपने लोगों, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दुनिया की भलाई के लिए एक साथ आगे बढ़ने का मौका है। पोम्पिओ ने कहा कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका रक्षा सहयोग को एक नए आयाम पर लेकर गया है, उन्होंने हिंद-प्रशांत के लिए साझे दृष्टिकोण को मजबूत किया है और आतंकवाद के लिए पाकिस्तान के अस्वीकार्य सहयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अब ट्रंप और मोदी प्रशासन के पास ”इस विशेष साझेदारी को और आगे ले जाने का अद्वितीय अवसर” है।

जयशंकर को मजबूत साझीदार बताया

पो‌म्पियो ने अपने नए समकक्ष भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को मजबूत साझेदार बताते हुए कहा कि ”उन्होंने अप्रैल में अपने एक भाषण में कहा था कि वह अमेरिका के साथ और अच्छे संबंध बनाना चाहते हैं और यह भावना दोनों ओर से है। हम आगे बढ़ना चाहते हैं।” मालूम हो कि जयशंकर अमेरिका में भारत के राजदूत भी रहे हैं।

सामरिक ढांचे को अपनाना होगा

पोम्पिओ ने दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर कहा कि ”मजबूत संबंध बनाने का मतलब इन व्यक्तिगत मित्रवत संबंधों को आधिकारिक बनाना है। उन्होंने कहा कि हमने हिंद-प्रशांत में एक जैसी सोच रखने वाले लोकतांत्रिक देशों भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया के बीच चतुर्भुज संवाद (क्वाड डायलॉग) में भी फिर से जान फूंकी है। ये सभी अच्छे कदम हैं।”

साथ ही उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका को ऐसे सामरिक ढांचे को अपनाना होगा जो दोनों देशों के लिए कारगर हो।

भारत का सम्मान करते हैं

पोम्पिओ ने कहा है कि ”हम एक संप्रभु ताकत के तौर पर भारत का सम्मान करते हैं, जिसकी अपनी अनूठी राजनीति और सामरिक चुनौतियां हैं।” उन्होंने कहा कि ”हम समझते हैं कि चीन या पाकिस्तान जैसे देशों से महासागर पार के बजाए सीमा पार से निपटना अधिक मुश्किल है।”

उन्होंने कहा कि ”यह स्वाभाविक है कि दुनिया में सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश को दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र के साथ हाथ मिलाना चाहिए ताकि वे हिंद-प्रशांत के लिए अपनी साझी सोच को आगे ले जा सकें।” साथ ही पोम्पिओ ने कहा कि ”तीसरा, हमें यह करके दिखाना होगा।”

रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष में हमारे स्पष्ट रूप से साझे हित

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ”ट्रंप प्रशासन ने सशस्त्र यूएवी और बैलेस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों जैसे अत्याधुनिक रक्षा मंचों समेत भारत को उच्च तकनीक की अधिक वस्तुओं के निर्यात के लिए अमेरिकी कंपनियों को सक्षम बनाया है। अपनी यात्रा और मोदी एवं विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के लिए उत्सुक पोम्पिओ ने कहा है कि ”रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष में हमारे स्पष्ट रूप से साझे हित।”

बता दें कि अमेरिकी विदेश मंंत्री इस महीने भारत आ रहे हैं। वे 24 से 30 जून तक भारत, श्रीलंका, जापान और दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे।

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