अमेरिका ने चीन पर दो दिन में किये दो बड़े हमले

बीजिंग : चीन ने बुधवार को कहा कि अमेरिका ने उसे ह्यूस्टन स्थित अपना वाणिज्य दूतावास बंद करने का आदेश दिया है। चीन ने इसे अपमानजनक और अनुचित कदम बताया है जिससे दोनो देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने अमेरिकी कदम की निंदा की। यह कदम ऐसे वक्त में आया है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने आगाह किया कि अगर अमेरिका अपना फैसला नहीं बदलता है तो कड़े जवाबी उपाय किए जाएंगे।

हाल के कदमों में अभूतपूर्व वृद्धि

वांग ने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘ थोड़े से समय के अंदर ह्यूस्टन में चीन के महावाणिज्य दूतावास को एकतरफा तरीके से बंद करना, चीन के खिलाफ उसके हाल के कदमों में अभूतपूर्व वृद्धि है।” अमेरिका की तरफ से कोई तत्काल पुष्टि या स्पष्टीकरण नहीं है। ह्यूस्टन में मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि अधिकारियों ने वाणिज्य दूतावास में आग की सूचना पर प्रतिक्रिया दी। ह्यूस्टन क्रोनिकल ने पुलिस के हवाले से खबर दी है कि चश्मदीदों ने बताया कि लोग कचरे के डिब्बे जैसी चीज में कागज जला रहे थे।

एक दिन पहले  चीन की 11 कंपनियों पर लगाया था व्यापार प्रतिबंध
अमेरिका ने चीन की 11 कंपनियों पर व्यापार प्रतिबंध लगाए हैं। इन कंपनियों के खिलाफ चीन के मुस्लिम जनसंख्या वाले शिनजियांग क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में लिप्त होने की शिकायतें हैं। अमेरिका द्वारा सोमवार को घोषित ये प्रतिबंध चीन पर दबाव बनाने की नयी कोशिश हैं। चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी पर इस क्षेत्र में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार, बंधुआ मजदूरी और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में रखने के आरोप लगते रहे हैं।
चार अधिकारियों पर भी प्रतिबंध
अमेरिका और चीन के संबंधों में गिरावट के कारणों में मानवाधिकार, व्यापार और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ शिनजियांग क्षेत्र का मु्द्दा भी शामिल है। अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने इन आरोपों के चलते चीन के चार अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं।
चीन ने अमेरिका के चार सीनेटरों पर लगाया जुर्माना
वहीं जवाबी कार्रवाई में बीजिंग ने उसके मानवाधिकार रिकॉर्ड का विरोध करने वाले अमेरिका के चार सीनेटरों पर जुर्माना लगाने की घोषणा की है। अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने कहा कि प्रतिबंधित सूची में डाले जाने से इन 11 कंपनियों की अमेरिकी सामान और प्रौद्योगिकी तक पहुंच सीमित होगी। हालांकि, विभाग ने इस बात की जानकारी नहीं दी कि इससे किन सामानों पर प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने एक बयान में कहा कि यह प्रतिबंध सुनिश्चित करेंगे कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी वहां के असहाय मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अमेरिकी सामान और प्रौद्योगिकी का उपयोग न कर सके।

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