प्रेगनेंसी में बढ़ जाता है जिंजिवाइटिस का खतरा, बच्चे पर होता है ये असर

नई दिल्ली : किसी भी महिला के लिए प्रेगनेंसी का समय खास होता है, इस दौरान महिला कई जटिल शारीरिक बदलावों से गुजरती है। प्रेगनेंसी के समय महिला का ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है, अगर जरा भी चुक हुई तो इसका प्रभाव पेट में पल रहे शिशु पर पड़ता है।
इनमें से एक है दांतों की देखभाल। दांतों की खराब देखभाल से गर्भावस्था को नुकसान हो सकता है। दांतों की देखभाल सिर्फ आप तक सीमित नहीं रहती। यह आप के गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी महत्वपूर्ण है। एक अध्ययन के मुताबिक स्वीडन के विशेषज्ञों ने पश्चिम आस्ट्रेलिया में 3400 गर्भवती महिलाओं से जुडे़ डेटा का विश्लेषण किया। विशेषज्ञों ने जांच में पाया कि जिन महिलाओं को मसूड़ों की समस्या है, उन्हें गर्भधारण करने में उन महिलाओं के मुकाबले 6 महीने का अधिक समय लगा, जिन्हें मसूड़ों की समस्या नहीं थी।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
डॉक्टर स्वाति अरोड़ा, डेंटल एक्सपर्ट क्यूआरजी हेल्थ सिटी, फरीदाबाद का कहना है कि अधिकतर गर्भवती महिलाओं को जिंजिवाइटिस मसूड़ों में सूजन या प्रेगनैंसी जिंजिवाइटिश हो सकती है। इसमें दूसरे तीसरे महीने से लेकर गर्भावस्था के आठवें महीने तक इस की गंभरता बढ़ सकती है, इस समय कुछ महिलाओं के मसूड़ों में खून आना, सूजन, लालिमा या फूलापन महसूस हो सकता है।

साथ ही कुछ मामलों में मसूड़े सूज जाते हैं। वे इरीटेंट्स के कारण बड़ी गांठ बना सकते हैं। ये गांठें या वृद्धि कि हुए भाग प्रेगनैंसी ट्यूमर कहलाते हैं। ये कैंसरस नहीं होते। ये शिशु के जन्म के बाद प्रायः गायब हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इन्हें दांतों के सर्जन से उपचार कराने की जरूरत पड़ सकती है, अपने मसूड़ों को पूरी तरह स्वस्थ बनाए रखना, गर्भावस्था से जुड़ी ऐसी पेरियोडोंटल समस्याओं से बचाव के सर्वोत्तम तरीका है। महिलाओं में परिसंचारी यौन हार्मोन- एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन की सांद्रताएं बढ़ना गर्भावस्था से जुड़ी परियोडोन्टल समस्याओं का कारण होता है। परियोडोन्टस रोग जैव शारीरिक द्रवों का स्तर बढ़ाते हैं जो प्रसव पीड़ा उत्पन्न करते हैं। योनि मार्ग से उपर जाते हुए मार्ग से भ्रूण तक संक्रणम नहीं पहुंचता, बल्कि यह रूधिर प्रवाह में प्रवेश करते हैं और मुख व गुहा से नीचे जाते हैं।

शिशु का सामान्य से कम वजन होने का खतरा
अध्ययनों से पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान पेरियोडोन्टल रोग से पीड़ित महिलाओं में समय पूर्व प्रसव (37 सप्ताह से पहले) या कम वजन (2.5 किलोग्राम से कम) का खतरा भी हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान पेरियोडोन्टाइटिस का उपचार करने से समय पूर्व प्रसव के जोखिम को टाला जा सकता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान जाने पेरियोडोन्टल हेल्थ की स्थिति
यदि आप गर्भवती हैं या होने की योजना है तो आप के पेरियोडोन्टल स्वास्थ्य की स्थिति, आपकी गर्भावस्था के दौरान पेरियोडोन्टल रोग का अनुभव करने वाल महिलाओं में प्रीक्लैम्प्सिया विकसित होने का खतरा दोगुना होता है, जिस में रक्तचाप उच्च हो जाता है व यूरिन में प्रोटीन जाने लगता है। इस से माता व उस के शिशु के लिए गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।

प्रेगनेंसी और ओरल हैल्थ
खानपना सही रखें जितनी अधिक बार आप स्नैक्स खाएंगी, दंतक्षय बनने की सम्भावनाएं उतनी ही बढ़ जाएंगी, साथ ही कुछ अध्ययनों से पता चला है कि दंतक्षय के लिए जिम्मेदार जीवाणु, माता से उस के शिशु में पहुंच जाते हैं, इसलिए अपने खानपान को ले कर विशेष रूप से सजग रहें। ओरल हैल्थ का ख्याल रखने से मां से शिशु तक ऐसे वैक्टीरिया पहुंचने की सम्भावना कम हो जाती है।

.चीनी युक्त स्नैक्स खाने से बचें, कुछ खाने के बाद हर बार अच्छी तरह पानी से कुल्ला कर के मुंह को साफ करें।
.दूध, पनीर, दही व अन्य डेयरी उत्पादों से युक्त स्वास्थ्यप्रद आहार, अनिवार्य खनिज तत्वों का प्रमुख स्रोत होता है।
.जो बच्चे के विकसित होते दांतों, मसूड़ों व अस्थियों के लिए अच्छा रहता है। याद रखें कि आप के बच्चे के प्रारंभिक दांत गर्भावस्था में 3 महीने बाद विकसित होने शुरू हो जाते हैं।
.मुख, दांतों व मसूड़ों को हर संभव साफ और स्वस्थ् रखें।
दांतों को सावधानीपूर्वक साफ कर के और ब्रश करने की सही विधि अपनाएं ।
. दांतों का चैकअप बहुत जरूरी है।

प्रेग्नेंसी में कब न करें दांतों का इलाज

गर्भावस्था के शुरुआती त्रैमास व तीसरे त्रैमास के दूसरे अर्द्धभाग के दौरान दांतों के उपचार से बचना चाहिए क्योंकि यह शिशु की वृद्धि व विकास के लिए महत्वपूर्ण समय होता है। दूसरे त्रैमास के दौरान नियमित इलाज किया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान दांतों का एक्स रे कराने से बचने की सलाह दी जाती है।

 

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