अनियमित पीरियड की समस्या नहीं है लाइलाज

प्रियंका तिवारी : महिलाओं में इनदिनों अनियमित मासिक की समस्या तेजी से बढ़ रही है। लगातार अनियमित मासिक हो तो यह स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। आमतौर पर महिलाओं में मासिक 12 –13 साल कि उम्र से शुरू होकर 48-50 साल की उम्र तक होता है। यह चक्र महीने में एक बार होता है और तीन से पांच दिन तक रहता है। वर्तमान जीवनशैली के कारण किशोरियों में जल्दी या फिर देर से मासिक धर्म की समस्या भी बढ़ रही है। डॉक्टर्स इसे ओलिगोमेनोरिया कहते हैं। एक स्वस्थ महिला के पीरियड्स की अवधि 21 से 35 दिन के बीच होती है।

इन दिनों 20 से 40 वर्ष की उम्र के बीच महिलाओं में अनियमित पीरियड्स की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन, जीवनशैली में परिवर्तन और दवाइयों का प्रभाव जैसे कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक यदि अनियमित पीरियड्स की समस्या 40 साल की आयु सीमा के बाद हो रही है तो इसके पीछे कारण होता है प्रीमेनोपॉज। अधिक तनाव की वजह से भी मासिक धर्म प्रभावित होता है।

अनियमित माहवारी के लिए हार्मोंस जिम्मेदार
महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन नाम के तीन हार्मोन मौजूद होते हैं। इन हार्मोंस का संतुलन बिगड़ने पर पीरियड्स में परेशानी शुरू होने लगती है। ज्यादा समय तक बीमार रहने या थाइरॉयड की वजह से भी महिलाओं में मासिक धर्म में बदलाव होने की संभावना बढ़ जाती है। 2 दिन से कम ब्लीडिंग होने का मतलब है अपर्याप्त पीरियड, जिसके लिए हॉर्मोनल कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जैसे हाइपोथायरॉयडिज्म या पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम पीसीओडी या पीआईडी या टीबी का ऐसा संक्रमण जिसका संबंध गर्भाशय से हो। गर्भनिरोधक गोली लेने से भी पीरियड हल्का हो सकता है या फिर इंट्रायूट्रिन डिवाइस जैसे मिरेना इंसर्ट किया गया हो तब भी। वहीं हैवी पीरियड न सिर्फ हाइपोथायरॉयडिज्म का संकेत होता है, बल्कि ये गर्भाशय में फाइब्रॉइड्स जैसे जख्म का सूचक भी होता है। सामान्य व स्वस्थ्य पीरियडप्रत्येक 25-35 दिन के अंतराल में आता है। अनियमित पीरियड्स इस बात का सिग्नल होते हैं कि महिला को ओवेरियन सिस्ट, थायरॉइड या पीसीओएस की दिक्कत है।

अनियमित माहवारी में गर्भाधारण
अनियमित माहवारी की वजह से गर्भधारण में भी समस्या आती है, लेकिन यह असंभव नहीं है। इसके लिए कई उपाय हैं। अनियमित माहवारी में महिलाओं को अपने अंडोत्सर्जन के लिए ज्यादा सर्तक रहना चाहिए। वे संतुलित खानपान और सतर्कता से ऐसा कर सकती हैं। जंकफूड से बचना चाहिए और वजन को लेकर भी सतर्क रहें । मोटापे से महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन ज्यादा बनने की संभावना बढ़ जाती है। इस स्थिति में लिपिड लेवल भी बढ़ा हुआ होता है, जिसकी वजह से ब्लड वेसल्स में फैट सेल्स भी बढ़ जाते हैं और ब्लड की नलियों में चिपक कर उन्हें संकीर्ण बना देते हैं। ये सेल्स ब्लड सप्लाई करने वाली नलियों को ब्लॉक भी देते हैं, इसलिए मोटापे पर नियंत्रण रखें।

अनियमित माहवारी के लक्षण
पीरियड्स में अनियमितता बढ़ने के कारण महिलाओं के यूटेरस में दर्द होता है। स्तन, पेट, हाथ-पैर और कमर में दर्द भी रहता है। ज्यादा थकान महसूस करना और भूख कम लगना भी इसका एक लक्षण है। कब्ज या दस्त की समस्या भी इस तकलीफ में हो जाती है। इसके अलावा यूटेरस में ब्लड क्लॉट्स का बनना भी मासिक धर्म की अनियमितता का लक्षण है।

इलाज है हार्मोनथेरेपी
डॉक्टर के निर्देशानुसार हार्मोन थेरेपी और जीवनशैली में जरूरी सुधार करके अनियमित मासिक धर्म की समस्या से निजात मिल सकती है।

आयुर्वेद में इलाज
आयुर्वेद के अनुसार महिलाएं अपने खान-पान और जीवनशैली में कुछ बदलाव करके अनियमित माहवारी की समस्या से उबर सकती हैं। आयुर्वेद के मुताबिक महिलाओं को मसालेदार, खट्टे या भारी भोजन के सेवन से बचना चाहिए। चाय, कॉफी और ठंडे पेय के सेवन भी कम करें। अनियमित पीरियड कि समस्या हो तो एक कप पानी में 1 चम्मच धनिया के बीज और दालचीनी पावडर उबालें। आधा कप पानी रह जाने पर इसमें आधा चम्मच पावडर रॉक कैंडी (या अनरिफाइंड चीनी) मिला लें। इस पानी को दिन में दो बार पिएं। इससे भी मासिक धर्म नियमित होने लगेगा। किसी भी तरह के शारीरिक और मानसिक तनाव से दूर रहें।

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