डिप्रेशन से सबसे ज्यादा भारत में मौत, 8 सालों में 50 फीसदी बढ़े हैं मामले

नई दिल्ली : आज की लाइफस्टाइल में घर हो या ऑफिस हर जगह लोगों को तनाव का सामना करना पड़ता है। खासकर महिलाएं तो दोहरी जिंदगी जी रही हैं, ऐसे में उन्हें आजकल काफी तनाव का सामना करना पड़ता है। तेजी से बढ़ता दबाव लोगों को डिप्रेशन का शिकार बना रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में डिप्रेशन 18 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। भारत में करीब 6 करोड़ लोग डिप्रेशन के शिकार हैं।

क्या कहती है रिपोर्ट-
– देश का हर 21वां इंसान डिप्रेशन का शिकार है।
– पिछले 8 सालों में 50 फीसदी डिप्रेशन के मरीजों में इजाफा हुआ है।
– देश में डिप्रेशन खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है।
– 2020 तक डिप्रेशन दुनिया में सबसे बड़ी बीमारी होगी।
– करीब 6 करोड़ लोग डिप्रेशन का शिकार हैं।
– डिप्रेशन के 18 फीसदी मरीज अकेले भारत में हैं।

डिप्रेशन दरअसल खराब लाइफस्टाइल के कारण होने वाली बिमारियों में से एक है। लाइफ स्टाइल के कारण डिप्रेशन किस तरह लोगों को चपेट में ले रहा है, इसपर हाल ही में निमहंस ने 30 से 49 साल की आयु के लोगों पर शोध किया। इस शोध के रिपोर्ट के मुताबिक –

– 38% नौकरीपेशा लोग 6 घंटे से कम नींद लेते हैं।
– 57% एक्सरसाइज नहीं करते, क्योंकि उनके पास समय की कमी होती है।
– 48% काम के दौरान थकान महसूस करते हैं।
– 27% लगातार सिरदर्द से ग्रस्त रहते हैं।

हालाँकि सबसे अहम् बात यह है कि लोगों को पता भी नहीं होता कि वो डिप्रेशन में हैं। ऐसा होने पर लोग सोचते हैं कि उन्हें थकान या कोई परेशानी है जो कुछ ही दिनों में ठीक हो जाएगी। यही वजह है कि आत्महत्या के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। सुसाइड के सबसे ज्यादा मामला इन दिनों डिप्रेशन के कारण सामने आ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में हर साल 8. 0 लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं। हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति तनाव के चलते मौत को गले लगा लेता है। ये आंकड़े तो रिकॉर्ड में दर्ज है, लेकिन असलियत और भी भयावह है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया देशों की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल का कहना है कि इन आत्महत्याओं को रोका जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि लोगों को जीवन से तनाव खत्म करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए, जिससे सुसाइड के मामलों में कमी आएगी।

 

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