स्ट्रेस और पैनिक अटैक से बचने के लिए करें ये उपाय

नई दिल्ली : लाइफस्टाइल के कारण मेंटल स्ट्रेस आजकल काफी बढ़ गया है। छोटी-छोटी बातों पर लोगों को गुस्सा आना और स्ट्रेस, डिप्रेशन जैसी तमाम मानसिक समस्याओं से महिलाएं जूझ रही हैं। कई बार महिलाएं पैनिक अटैक का शिकार होती हैं और उन्हें हार्ट अटैक जैसा महसूस होता है और वे जल्दी डर जाती हैं और तनाव में आ जाती हैं।

डॉक्टर्स कहते हैं कि इस समस्या को हलके में ना लें, ऐसा महसूस होने पर डॉक्टर्स से सलाह लें। डॉक्टर्स का कहना है कि पैनिक अटैक से जान जाने का खतरा नहीं होता, लेकिन इससे जिंदगी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। रोजमर्रा के जीवन में आप ज्यादा स्ट्रेस में रहती हैं तो ख्याल रहें। ऐसी स्थिति में कुछ आसान तरीके आप अपना सकती हैं। अगर आपको स्ट्रेस हो रहा हो और पैनिक अटैक आ रहा हो तो उलटी गिनती गिनें और या उन चीजों पर ध्यान दें जिन पर आमतौर पर ध्यान नहीं जाता। आसपास दिख रहे खूबसूरत डिजाइन्स, आर्ट वर्क, टीवी, कोई अच्छी फिल्म, गाना या फिर किसी क्रिएटिव चीज पर फोकस करें। इससे आप अपने इमोशन्स भी बेहतर तरीके से मैनेज कर सकती हैं।

अक्सर इश्तेमाल की चीजों में से फोन, पास की खिड़की, कुर्सी, बैग या कोई नोटपैड पर ध्यान केंद्रित करें। आसपास से आने वाली चीजों पर ध्यान लगाएं, जैसे ट्रैफिक का शोर, हेडफोन का म्यूजिक, किसी टेलीफोन की घंटी 3 आदि। अपनी ड्रेसम बाल चीजों की बनावट पर ध्यान केंद्रित करें। चाय कॉफ़ी, अच्छा लंच, ब्रेकफास्ट कॉफी पीते हुए खुद को सामान्य करें।

खुद को करें काबू
मन परेशान हो तो अपनी सांसो पर फोकस करें। साँसों का उतार चढाव सही करें, सांस लें और छोड़ों। सीधे ताड़ासन की मुद्रा में खड़े हो जाएं तुरंत फायदा मिलता है। इससे शरीर का वजन और टेंशन सीधे पैरों में चली जाती है और यहां से यह जमीन में एब्जॉर्ब हो जाती है। इससे आपको खुद को बैलेंस करने में बहुत ज्यादा मदद मिलेगी।

पब्लिक प्लेस पर हैं तो आस पास के लोगों को देखें। आस पास की चीजों को देखने से आपका ध्यान हटेगा और आप कुछ ही देर में खुद को पूरी तरह नार्मल महसूस करेंगी। साइकैट्रिस्ट का कहना है कि अगर बार बार पैनिक अटैक पड़ता हो पैनिक डिसऑर्डर की संभावना बढने लगती है और इसका ट्रीटमेंट जरूरी है। इस समस्या के लिए आम तौर पर दो तरीके अपनाए जा सकते हैं- मेडिकेशन और दूसरा रिलैक्सेशन ट्रेनिंग। रिलैक्सेशन ट्रेनिंग में ईआरपी यानी एक्सपोजर एंड रेसपौंस प्रीवेंशन तकनीक।

इसमें पहले रिलैक्स करना सिखाया जाता है और उस स्थिति सामना करने के लिए तैयार किया जाता है, जिससे व्यक्ति डरता है। बार-बार यह प्रक्रिया करने से डर खत्म हो जाता है। किसी विशेष स्थिति से डरने पर इलाज जरूरी होती है, क्योंकि दिमाग में फियर सर्किट एक्टिवेट होने पर न्यूरोकैमिकल्स बिगड़ जाते हैं, उन्हें ठीक करने के लिए दवाइयां लेने की जरूरत पड़ती है। थेरेपी से सुधर होता है।

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