माउथवॉश दे सकता है कोरोना को मात, शोधकर्ताओं ने किया दावा

नई दिल्ली : कोरियन यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि माउथवॉश से कोरोना वायरस के असर को लगभग दो घंटे के लिए रोका जा सकता है। इस अध्ययन के मुताबिक त्वचा को डिसइनफेक्ट करने वाले रसायन ‘क्लोरहेक्सिडाइन’ से बना माउथवॉश वायरस को कुछ घंटों तक रोक सकता है।

अध्ययन के मुताबिक कोरोना के मरीज इस माउथवॉश से कुल्ला करें तो लगभग दो घंटे के लिए वे संक्रमण नहीं फैला पाएंगे। त्वचा के डॉक्टर, ईएनटी, नेत्र रोग, जनरल फिजिशियन, डेंटल क्लीनिक और कई अन्य तरह के क्लीनिक पर इसका उपयोग सुरक्षित हो सकता है।

30 सेकंड तक करें माउथवॉश

अध्ययन के मुताबिक मुंह को डिसइनफेक्ट करने के लिए माउथवॉश की 10 मिलीलीटर मात्रा से कुल्ला करना होगा। 0.2 प्रतिशत क्लोरहेक्सिडाइन का मिश्रण होना चाहिए। इसका इश्तेमाल कर के कोई भी व्यक्ति संक्रमण से बच सकता है।

क्या है क्लोरहेक्सिडाइन

यह कीटाणुनाशक है, जिसका इस्तेमाल त्वचा को संक्रमणमुक्त करने के लिए किया जाता है। सर्जरी से पहले मरीज के शरीर व हेल्थवर्कर के हाथ साफ करने के लिए भी इसका इस्तेमाल करते हैं।

कैसे करता है काम

कार्डिफ यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन और कैम्ब्रिज इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने भी इसे कारगर बताते हुए कहा है कि वायरस के चारों ओर वसा की एक परत होती है। माउथवॉश में मौजूद क्लोरहेक्सिडाइन उस परत तो तोड़ देता है।

कोरियन शोधकर्ताओं का कहना है कि सलाइवा में ज्यादा संख्या में वायरस होते हैं और कुछ बूंदें भी दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं। क्लोरहेक्सिडाइन के कारण लार में वायरस की संख्या दो घंटे के लिए घट जाती है, हालांकि दो से चार घंटे बाद वायरस की मात्रा फिर बढने लगती है। ऐसे में यह कम समय के लिए ही कारगर है।

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